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Tilwara Mela : बाड़मेर में एक करोड़ रुपए का घोड़ा ‘श्याम’, बिहार के बाहुबली विधायक ने दिया प्रस्ताव, मालिक ने बेचने से किया इंकार

Tilwara Mela : बाड़मेर के तिलवाड़ा मेले में पहुंचे घोड़ों में एक अश्व की कीमत एक करोड़ रुपए आंकी गई, लेकिन मालिक ने उसे बेचने से इंकार कर दिया। जानें घोड़े श्याम की खासियतें।

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Barmer Tilwara Mela One crore rupees worth horse Shyam owner refused to sell You will be surprised to know specialties

बाड़मेर के तिलवाड़ा मेले में मशहूर घोड़ा। फोटो पत्रिका

Tilwara Mela : बाड़मेर के तिलवाड़ा मेले में पहुंचे घोड़ों में एक अश्व की कीमत एक करोड़ रुपए आंकी गई, लेकिन मालिक ने उसे बेचने से इंकार कर दिया। सिन्धी नस्ल का पांच साल का यह घोड़ा पूरे मेले में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करीब 45 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाले इस अश्व ने देशभर की 10 रेस में अब तक सभी घोड़ों को पछाड़ा है। वर्तमान में इसकी ऊंचाई करीब 61 इंच है।

बाड़मेर के रूपसिंह खारा अश्वपालक है। अश्वपालक रूपसिंह खारा ने बताया कि वे सोढ़ाकोर से इसे तीन माह की उम्र में लाए थे। पहले उनके पास ‘बाज’ नाम का घोड़ा था, जो क्षेत्र में प्रसिद्ध था। उसके बाद उन्होंने इस घोड़े को उसी तरह तैयार किया। इसका नाम 'श्याम' रखा।

प्रशिक्षण के लिए अश्वपालक का खुद का जानकार होना जरूरी है। घोड़े को रेस में उतारने के लिए उसकी दौड़ पर ध्यान देना होता है। हर दूसरे तीसरे दिन इस घोड़े को पांच से सात किमी की रफ्तार की दौड़ सिखाई गई है। रेस के मैदान में पहली बार उतारने से पहले भी घर के घोड़ों के साथ दौड़ने की प्रेक्टिस हुई। इस वजह से यह घोड़ा बाजी मार रहा है।

संतुलित खुराक और नियमित प्रशिक्षण

रूपसिंह बताते है कि 'श्याम' को दूध, मक्खन, घी और ड्राइ फ्रूट्स सहित संतुलित खुराक दी जाती है। जिससे उसके शरीर शौष्ठव व बलिष्ठता की पूर्ति हो सके। इसके साथ घास, चना, बाजरा और अन्य आहार भी दिया जाता है। अश्वपालक ने बताया कि घोड़े को प्रशिक्षण के तहत हर दूसरे-तीसरे दिन इसे 5 से 7 किमी तक दौड़ाया जाता है, जिससे इसकी गति और क्षमता बनी रहती है।

मेले में 2800 घोड़ों की आवक

इस बार तिलवाड़ा मेले में करीब 2800 घोड़े पहुंचे हैं। पंजाबी और काठियावाड़ी अश्वपालक यहां मारवाड़ी और सिंधी नस्ल के घोड़ों में खास रुचि दिखा रहे हैं। यहां आए पंजाब के गुरमीतसिंह ने बताया कि मालाणी और सिंधी नस्ल के घोड़ों की खूबसूरती ही अलग है। इसलिए अब पंजाब में इनकी मांग बढ़ रही है।

घोड़े की खरीदारी का प्रस्ताव, इनकार

तिलवाड़ा मेले में इस घोड़े को देखने के लिए लोग उमड़े। इधर, बिहार के विधायक अनंतसिंह की ओर से भी इस घोड़े की खरीदारी का प्रस्ताव उनके अश्वपालकों ने दिया। हालांकि रूपसिंह ने इस घोड़े को बेचने से फिलहाल इंकार कर दिया।

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