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मौसम में बदलाव से बढ़ा निमोनिया का खतरा

मौसम में बदलाव के साथ सीकर में मौसमी बीमारियों ने पैर जमाने शुरू कर दिए हैं। फरवरी मार्च में अक्सर हेल्दी मौसम रहता है, लेकिन इस बार तापमान में उतार-चढ़ाव सेहत को चपेट में ले रहा है। चिंताजनक बात है कि मेडिसिन ओपीडी में औसतन हर पांचवे मरीज में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत […]

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मौसम में बदलाव के साथ सीकर में मौसमी बीमारियों ने पैर जमाने शुरू कर दिए हैं। फरवरी मार्च में अक्सर हेल्दी मौसम रहता है, लेकिन इस बार तापमान में उतार-चढ़ाव सेहत को चपेट में ले रहा है। चिंताजनक बात है कि मेडिसिन ओपीडी में औसतन हर पांचवे मरीज में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत है। इनमें से कई मरीज निमोनिया के लक्षण लेकर आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की सैंट्रल लैब में जांच कराने वालों की संख्या में महज दो दिन में ही करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चिकित्सकों के अनुसार तापमान में अचानक बदलाव और ठंडी हवा के संपर्क में आने से श्वसन तंत्र पर असर पड़ रहा है, जिससे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। मेडिकल कॉलेज के अधीन कल्याण अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में सर्दी जुकाम के लक्षणों वाले औसतन सवा सौ से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। मौसम में बदलाव की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आगामी दिनों में निमोनिया और श्वसन संक्रमण के मामले बढ़ेंगे।

बच्चों में ज्यादा खतरा

चिकित्सकों के अनुसार और रात के तापमान में गिरावट और ठंडी हवाएं चलने से लोगों को जुकाम, बुखार की समस्या बनी हुई है। इस मौसम में बच्चे भी बीमारियों की चपेट में अधिक आ रहे हैं। रात के समय सर्दी की वजह से बच्चे निमोनिया के साथ-साथ खांसी, बुखार, कफ जमाव, दस्त आदि की चपेट में आ रहे हैं। शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के लिए सर्दी से ज्यादा नुकसान सर्द हवाएं होती है। ऐसे में बच्चों को इस मौसमी बदलाव से बचाए रखने के लिए पूरी सावधानी रखने की जरूरत होती है। हालांकि बच्चों के जन्म के बाद लगने वाली वैक्सीन में निमोनिया की वैक्सीन शामिल होती है। जिन बच्चों को वैक्सीन लगती है उन्हें वायरल इंफेक्शन से होने वाली निमोनिया होने की संभावना 90 फीसदी तक कम हो जाती है।

ये करें उपाय

ठंडी और प्रदूषित हवा से बचें। गुनगुना पानी पिएं और हल्का, पोषक भोजन लें। इम्युनिटी बढ़ाए रखने वाली चीज खाएं। ड्राई फ्रूट्स एवं मौसमी फल आदि का सेवन करने के साथ ही बदलते मौसम के हिसाब से पहनने ओढ़ने के कपड़े एकदम नहीं उतारें। किसी भी लक्षण के दिखने पर फौरन चिकित्सक से सलाह लें। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुकेश वर्मा का कहना है कि मौसम तंत्र में आए बदलाव के कारण अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी जुकाम के मरीज बढ़े हैं। हर पांचवे मरीज में संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हैं। सावधानी नहीं रखने पर आगामी दिनों में मरीजों में निमोनिया बनने का खतरा बढ़ रहा है।