
कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा
नई दिल्ली. कम्युनिटी ट्रांसमिशन यानी समूह प्रसार को लेकर महामारी विज्ञानी और चिकित्सा विशेषज्ञों ने आगाह किया है। इनका कहना है कि देश के कई हिस्सों में कम्युनिटी ट्रांसमिशन पहले ही बड़े पैमाने पर फैल चुका है। लॉकडाउन की सख्ती के बावजूद कोरोना के मामलों को बढऩे से नहीं रोका जा सका। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने नीति निर्धारकों की बजाय संचरण की अच्छी जानकारी रखने वाले महामारी विज्ञानियों से पहले परामर्श किया होता तो आज बेहतर स्थिति में होते।
बयान में कहा गया कि ऐसा लगता है सरकार ने मुख्य रूप से जांच और प्रशिक्षण की कम जानकारी रखने वाले चिकित्सकों और विशेषज्ञों की सलाह पर काम किया। नीति निर्माताओं की महामारी विज्ञान, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वालों की बजाय नौकरशाहों पर निर्भरता के कारण देश बड़ी कीमत चुका रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन से विस्फोटक स्थिति पैदा हो सकती है।
ये खामियां और सुझाव बताए
इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन (आइपीएचए), इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (आइएपीएसएम) और इंडियएन एसोसिएशन ऑफ एपिडेमियोलॉजिस्ट ने 11 सिफारिशें की हैं, जिनसे हालात को बिगडऩे से रोका जा सकता है। जैसे प्रतिबंधों में बदलाव के साथ लॉकडाउन और जांच, ट्रेस, टै्रक के लिए क्लीनिकल परीक्षण बढ़ाना, हॉटस्पाट की पहचान कर सक्रिय निगरानी, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की पुख्ता सुविधाएं शामिल हैं।
* देश में कोरोना के ज्यादातर मामले हल्के लक्षण वाले या बिना लक्षण के थे। इनमें ज्यादातर को घर पर उपचार किया जाना चाहिए।
* प्रवासियों को महामारी की शुरुआत में घर जाने की अनुमति दी जाती तो देश के हर कोने में संक्रमण ले गए प्रवासियों के कारण वर्तमान स्थिति से
बचा जा सकता था।
* ज्यादातर प्रवासी उन इलाकों के थे, जहां जांच सुविधा और स्वास्थ्य देखभाल काफी कम थी।
* संघों ने कहा कि नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में गड़बड़ी और बड़ी आबादी की आजीविका के कारण लॉकडाउन को अनिश्चितकाल के लिए लागू नहीं
किया जा सकता।
Published on:
08 Jun 2020 01:14 am

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