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दशहरा उत्सव : दो दशक पहले 8 हजार में तैयार हो जाते थे पुतले, अब बांस में ही खर्च हो जाते हैं 25 हजार

नगर के पॉलिटेक्निक ग्राउण्ड में दशहरे की तैयारी, बन रहे रावण, मेघनाथ व कुंभकरण के पुतल

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शहडोल. नगर के पॉलिटेक्निक ग्राउण्ड में असत्य पर सत्य की विजय के पर्व दशहरा को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो गई हंै। यहां 60 फिट के रावण के साथ 35-35 फिट के कुंभकरण व मेघनाथ के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही दशहरा उत्सव को लेकर अन्य तैयारियां भी प्रारंभ हो गई हैं। दो दशक से दशहरा उत्सव के लिए पुतलों का निर्माण कर रहे मेढक़ी कोल ने बताया कि पहले 8-10 हजार में तीनों पुतले तैयार हो जाते थे, लेकिन अब महंगाई इतनी बढ़ गई है कि 20-25 हजार रुपए तो पुतले का ढांचा तैयार करने में उपयोग होने वाले बांस खरीदने में ही खर्च हो जाते हैं। 20 वर्ष पहले इन पुतलों का निर्माण 8 हजार में किया था, इस वर्ष 1 लाख रुपए में बना रहे हैं। महंगाई बढऩे से इन्हें तैयार करने में जो लागत लगती थी वह भी कई गुना बढ़ गई है।

दस दिन से ज्यादा का लगता है समय
पॉलिटेक्निक ग्राउण्ड में पुतला तैयार कर रहे कारीगरों ने बताया कि तीनों पुतले तैयार करने में 10-15 दिन का समय लगता है। यहां 1 अक्टूबर से तैयारी में जुट गए थे, अभी बहुत काम बांकी है। इन पुतला को तैयार करने में बड़ी मात्रा में बांस व रद्दी पेपर की आवश्यकता होती है। इसके अलावा गिफ्ट पेपर, नारियल की रस्सी, मैदा के साथ ही अन्य आवश्यक सामग्रियां लगती है। शुरुआत में 20 लोग लगे थे, अब ब्यौहारी और राजनगर में भी पुतले बनाने हैं, इसलिए कुछ लोग वहां चले गए हैं। यहां 10-15 लोग ही बचे हैं।

राजनगर से की थी शुरुआत
पुतला बनाने की जिम्मेदारी लेने वाले मेढक़ी निवासी राजू कोल ने बताया कि उन्होंने दशहरा उत्सव में पुतला बनाने की शुरुआत राजनगर से की थी। शहडोल में लगभग 20 वर्ष से पुतला बना रहे हैं। रावण, मेघनाथ व कुंभकरण के पुतलों की लंबाई शुरू से ही इतनी ही रही है। इस बार इन्हें कुछ और आकर्षक बनाने का प्रयास किया है। दशहरा उत्सव में रावण, मेघनाथ व कुंभकरण के साथ ही आतिशबाजी व लाइटिंग आकर्षण का केंद्र होगी। इसके लिए नगर पालिका अलग से व्यवस्था कर रही है।