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गांवों में कैसे कटे अफसरों की रात, जब चस्का लगा एसी का ‘सरकार’

सरकार ने प्रदेश की जिला परिषदों को आदेश दिए थे कि जनता की पीड़ा को जानने और उसे दूर करने के लिए अधिकारी गांवों में रात्रि विश्राम करें और इसकी रिपोर्ट भेजें। पंचायती राज विभाग के अंतर्गत आने वाले जिला परिषद के अधिकारियों ने यह आदेश हवा में उड़ा दिए।

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सरकार ने प्रदेश की जिला परिषदों को आदेश दिए थे कि जनता की पीड़ा को जानने और उसे दूर करने के लिए अधिकारी गांवों में रात्रि विश्राम करें और इसकी रिपोर्ट भेजें। पंचायती राज विभाग के अंतर्गत आने वाले जिला परिषद के अधिकारियों ने यह आदेश हवा में उड़ा दिए। प्रदेशभर से किसी भी अधिकारी की रात्रि विश्राम की रिपोर्ट नहीं भेजी गई।

इस पर सरकार ने नाराजगी जताई है। साथ ही एक जनवरी से लेकर अब तक की रात्रि विश्राम रिपोर्ट मांग ली, जिससे अफसरों में हड़कंप मच गया है। आदेश में 10 अधिकारियों को रात्रि विश्राम करने के आदेश दिए गए थे। जानकार कहते हैं कि अधिकारियों को एसी की हवा अच्छी लगती है। ऐसे में मच्छरों के बीच अफसर क्यों जाएंगे?

ये थे आदेश

सरकार ने प्रदेशभर के जिला परिषद के 10 अधिकारियों से कहा था कि हर माह में चार रातें गांव में गुजारेंगे। यानी रात्रि विश्राम करेंगे। जनता की समस्या भी सुनकर उनका निदान करेंगे। रात्रि विश्राम का समय शाम छह बजे से सुबह 6 बजे तक रखा गया था। इस अवधि में जाना जरूरी था, लेकिन प्रदेशभर से किसी भी अधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट पंचायती राज विभाग को नहीं पहुंची। हालांकि अलवर के कुछ अधिकारियों ने ग्रामीण इलाकों में दौरे जरूर किए हैं।

इन अधिकारियों को करना था रात्रि विश्राम

मुख्य कार्यकारी अधिकारी
अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी
विकास अधिकारी
अधिशाषी अभियंता
सहायक अभियंता
कनिष्ठ अभियंता
अधीक्षण अभियंता
अतिरिक्त मुख्य अभियंता
अतिरिक्त विकास अधिकारी
सहायक विकास अधिकारी

ये आया फरमान

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के शासन सचिव डॉ. जोगाराम ने पिछले दिनों एक बैठक में कहा कि सरकार के स्तर से समीक्षा की गई, जिसमें पाया गया कि किसी भी अधिकारी ने रात्रि विश्राम की रिपोर्ट नहीं भेजी, जो गंभीर लापरवाही है। रात्रि विश्राम करना जरूरी था, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। ऐसे में अब एक जनवरी से लेकर अप्रेल तक रात्रि विश्राम, दौरे, निरीक्षण की रिपोर्ट 30 अप्रेल तक भेज दें। अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें। अनुशासनात्मक कार्रवाई सीधे सरकार की ओर से की जाएगी।

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