
Mangla Gauri Vrat Ka Mahatva Puja Vidhi and Katha 30 July 2019
जयपुर.
श्रावण मास के हर मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत किया जाता है। गौरी यानि माता पार्वती को समर्पित यह व्रत कई मनोरथ पूरे करता है। मंगला गौरी पूजन में सुहाग के समान और 16 वस्तुओं का महत्व होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस दिन मां पार्वती की पूजा करते हुए उनका ध्यान करे और साथ ही इस व्रत में अन्न को ग्रहण नहीं करना चाहिए। अगर आप सावन के महीने में मां मंगला गौरी का व्रत कर रहे हैं, तो सुबह सूर्य उदय होने से पहले उठकर स्नान कर लें। उसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करे। मां मंगला गौरी की रोली-चावल से पूजा करके सोलह श्रृंगार की वस्तु चढ़ायें| उसके बाद सोलह तरह की सभी चीजों जैसे फूल, माला, फल, पत्ते, आटे के लड्डू, पान, सुपारी, लोंग, इलायची तथा पंचखो इत्यादि का प्रसाद रखे| इसके बाद कथा करे और मंत्र का जाप कर आरती करे|
पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार प्राय: कुंवारी कन्याएं या सुहागन स्त्री यह व्रत करती हैं। विवाह की बाधा दूर करने, वैवाहिक जीवन में खुशहाली, पुत्र की प्राप्ति व सौभाग्य के लिए यह व्रत श्रेष्ठ है. यह पांच सालों तक किया जाता है.
Published on:
07 Jul 2020 07:04 am
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