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उम्र, काम और हालात से लड़कर सेवा में जुटीं ये कोरोना वॉरियर्स

-95 साल की बुजुर्ग से लेकर हाल ही में मातृत्व अवकाश से लौटी आइएएस मां संक्रमणकाल में सेवाधर्म से जगा रहीं कोरोना को हराने की उम्मीद
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जयपुर

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Mohmad Imran

Apr 15, 2020

उम्र, काम और हालात से लड़कर सेवा में जुटीं ये कोरोना वॉरियर्स

उम्र, काम और हालात से लड़कर सेवा में जुटीं ये कोरोना वॉरियर्स

कोरोना वायरस जैसी महामारी ने इससे निपटने की हमारी तैयारियों के सारे भ्रम तोड़ दिए हैं। लेकिन एक छोटी सी कोशिश भी कई बार उम्मीदों का पुल बांधकर मुसीबत के पार जाने का रास्ता दिखा देती है। कोरोना वायरस के तीव्र प्रसार को रोकने, इसकी कारगर दवा जल्द से जल्द विकसित करने और लोगों को सोशल डिस्टैंसिंग की पालना करने के लिए प्रेरित करने की हर कोई कोशिश कर रहा है। कोशिशों की इसी कड़ी में कुछ अन्य कर्मवीर भी शामिल हैं जिनके हौसलों से समाज और सरकार को सकारात्मक ऊर्जा और हिम्मत मिलती है

पेंशन दान दी, मास्क भी बना रहीं
मिज़ोरम की रहने वाली 95 वर्षीय पी. एम. नघाकालियानी ने कोरोना पीडि़तों की सहायता के लिए बने मुख्यमंत्री राहत कोष में अपनी मासिक पेंशन दान कर दी है। लेकिन उन्होंने इतने पर ही तसल्ली नहीं की। वे अब फ्रंटलाइन में काम कर रहे चिकित्सकों और नर्सों के लिए घर पर ही कपड़े का मास्क बनाने का काम कर रही हैं। द्वितीय विश्व युद्ध और मिजोरम में उग्रवाद की साक्षी रह चुकीं नघाकालियानी उन्होंने कोरोना वायरस की स्थिति जैसी स्थिति कभी नहीं देखी थी। उन्होंने अपने ्रदिवंगत पति की मासिक 14,500 रुपये की पेंशन मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए। वे रोज सिलाई करके 10 से 20 कपड़े के मास्क भी बना रही हैं। मिजोरम में मास्क की भारी कमी है और वे महंगे भी हैं। चीनी मास्क जिसकी कीमत पहले 10 रुपये थीए अब 100 से 200 रुपये प्रति पीस में बिक रहे हैं। इसलिए उन्होंने ऐसा करने की सोची।

प्रेग्रेंसी के 22वें दिन ही ड्यूटी पर
देश में कोरोनोवायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए 2013 बैच की आईएएस अधिकारी श्रीजना गुम्माला अपने काम पर वापस लौट आई हैं। उनका वापस आना इसलिए चर्चा का विषय है क्योंकि उन्होंने बीते महीने ही एक बेटे को जन्म दिया है और 22वें दिन ही काम पर वापस लौट आईं। उन्होंने छह महीने का मातृत्व अवकाश लेने से भी इनकार कर दिया और जिम्मेदारियां संभालने के लिए काम पर लौट आईं। वे अपने नवाजात बेटे को भी अपने साथ ही कार्यालय लेकर आती हैं और सभी सुरक्षा उपायों की पालना करते हुए बेटे को गोदी में लिए ही काम निपटाती हैं। ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम आयुक्त श्रीजना का ये जज्बा देखते ही देखते सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।

भीलवाड़ा मॉडल का महिला चेहरा
राजस्थान के भीलवाड़ा मॉडल को पूरा देश में कोरोना के ब्रेकडाउन से निपटने का सबसे आदर्श मॉडल माना जा रहा है। इस मॉडल की कड़ाई से पालना कराने वाली पुलिसिया कोरोना वॉरियर्स की पहली पंक्तिमें आइएएस अधिकारी टीना डाबी भी खड़ी थीं। भीलवाड़ा को कोरोना का हॉटस्पॉट बनने से रोकने के लिए टीना और उनकी सक्रिय टीम ने सूझबूझ और अनुशासन से काम लिया। जिले में संक्रमण का पहला मामला 19 मार्च को सामने आया। जिला कलेक्टर ने देशव्यापी बंद से पहले ही 21 मार्च को कस्बे में बंद की घोषणा कर दी। कड़ाई से महालॉकडाउन की पालना करवाने के लिए टीना और उनकी टीम ने कोई कोताही नहीं बरती। लोगों को घरों में रखने के हर संभव के बीच खाने-पीने की चीजों की दिक््रकत न हो इसका भी खयाल रखा गया, लोगों को शामिल करने से महालॉकडाउन भी सफल रहा। अब इसे कोरोनवायरस के खिलाफ एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। 2018 से भीलवाड़ा की एसडीएम 26 वर्षीय टीना ने बताया कि पूरे जिले को आइसोलेशन वार्ड की तरह ट्रीट किया गया, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में वृहद स्तर पर स्क्रीनिंग की गई और क्वारनटाइन और आइसोलेशन एवं कड़ी निगरानी के जरिए इस महामारी को फैलने से रोक दिया गया। मॉडल की सफलता के लिए उन्होंने अपनी टीम के साथ अधिक से अधिक लोगों खासकर समाज के प्रतिनिधियों को विश्वास में लिया,लोगों को घरों तक जरुरत का सामानपहुंचाया गया, इमरजेंसी कॉल सेंटर्स को अलर्अ मोड पर रखा गया और फंसे हुए लोगों की भी मदद की गई।