कोठी को छोडऩे के पहले स्तुति ने वृद्धा से अपना मेहनताना मांगा जिसे लेकर हील-हुज्जत हुई। आखिरकार वृद्धा ने यह माना कि स्तुति के 53 हजार रुपए उसके पास जमा है। लगभग चार सालों से एक घर में कैद स्तुति को 53 हजार रुपए का मेहनताना दे दिया गया, लेकिन यदि इसे एक माह के वेतन से जोड़कर देखे तो छत्तीसगढ़ की एक बेटी महज 11 सौ चार रुपए के मासिक वेतन पर दिल्ली में कार्य कर रही थी।