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Rajasthan Politics : कांग्रेस ने जिला कमेटियों में किया भारी फ़ेरबदल, अध्यक्ष समेत सभी पदों पर बदलाव, देखें जारी हुई सूची 

राजस्थान कांग्रेस ने मिशन 2028 और आगामी स्थानीय चुनावों के लिए कमर कसते हुए जोधपुर शहर, डूंगरपुर, बारां और सलूम्बर में नई जिला कमेटियों की घोषणा कर दी है।

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Rajasthan Congress- File PIC

Rajasthan Congress- File PIC

राजस्थान में विपक्षी दल कांग्रेस 'एक्शन मोड' में नजर आ रही है। पंचायत और निकाय चुनावों की आहट के बीच राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (RPCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपनी सांगठनिक मशीनरी को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में गुरुवार को राजस्थान कांग्रेस ने चार महत्वपूर्ण जिलों- जोधपुर शहर, डूंगरपुर, बारां और सलूम्बर की जिला कांग्रेस कमेटियों (DCC) की घोषणा कर दी है। इन नियुक्तियों ने न केवल पार्टी के भीतर नई ऊर्जा भरी है, बल्कि भाजपा के खेमे में भी चुनावी हलचल तेज कर दी है।

4 जिला कमेटियों में फेरबदल

डोटासरा के अनुमोदन के बाद जारी की गई सूची में अनुभवी और युवा चेहरों का संतुलन देखने को मिल रहा है। प्रमुख नियुक्तियां इस प्रकार हैं:

जोधपुर शहर: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर की कमान ओंकार वर्मा को सौंपी गई है। गहलोत के गढ़ में संगठन को एकजुट रखना वर्मा के लिए बड़ी चुनौती होगी।

डूंगरपुर: आदिवासी अंचल में कांग्रेस की पैठ बनाए रखने के लिए गणेश घोघरा पर एक बार फिर भरोसा जताया गया है। घोघरा अपनी आक्रामक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।

बारां: हाड़ौती क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण जिले में हंसराज मीणा को जिला अध्यक्ष बनाया गया है।

सलूम्बर: नवगठित जिले सलूम्बर में संगठन की नींव मजबूत करने की जिम्मेदारी परमानंद मेहरा को दी गई है।

पूरी कार्यसमिति का ढांचा तैयार

इस बार की घोषणा में खास बात यह है कि केवल जिला अध्यक्षों के नाम तय नहीं हुए हैं, बल्कि पूरी कार्यसमिति का ढांचा तैयार किया गया है।

  • पदों का वितरण: उपाध्यक्ष, सचिव, महासचिव, कोषाध्यक्ष और संगठन महासचिव के पदों पर नियुक्तियां की गई हैं।
  • डिजिटल और मीडिया विंग: आधुनिक चुनाव प्रबंधन को देखते हुए प्रवक्ता और सोशल मीडिया प्रभारियों की विशेष तैनाती की गई है ताकि सरकारी नीतियों का डटकर मुकाबला किया जा सके।

निकाय और पंचायत चुनाव पर नजर

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इन नियुक्तियों का समय बेहद महत्वपूर्ण है।

  • स्थानीय चुनाव: राजस्थान में जल्द ही निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। कांग्रेस चाहती है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को 'लीडरशिप' मिले ताकि वे जनता के बीच जा सकें।
  • गुटबाजी पर लगाम: इन नियुक्तियों के जरिए डोटासरा ने संदेश दिया है कि पार्टी में केवल काम करने वालों को तवज्जो मिलेगी। संगठन महासचिवों की नियुक्ति इसी कड़ी का हिस्सा है ताकि अनुशासन बना रहे।

हाड़ौती-मेवाड़ में समीकरण साधने की कोशिश

बारां और सलूम्बर की नियुक्तियां यह दर्शाती हैं कि कांग्रेस मेवाड़ और हाड़ौती में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना चाहती है।

  • आदिवासी कार्ड: डूंगरपुर में गणेश घोघरा की नियुक्ति 'भारत आदिवासी पार्टी' (BAP) के बढ़ते प्रभाव को रोकने की एक रणनीतिक कोशिश भी हो सकती है।
  • हाड़ौती में पकड़: बारां में हंसराज मीणा के जरिए कांग्रेस मीणा वोट बैंक और स्थानीय मुद्दों को भुनाने की तैयारी में है।

क्या भाजपा के 'विजय रथ' को रोक पाएगी कांग्रेस?

बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल पदाधिकारियों की फौज खड़ी कर देने से कांग्रेस का काम बन जाएगा? भाजपा इस समय सत्ता में है और उसकी पकड़ मजबूत है। डोटासरा ने जिन चेहरों को चुना है, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं की निराशा को दूर करना और उन्हें सड़कों पर संघर्ष के लिए तैयार करना है।