
प्रदेश की ए क्लास श्रेणी में शामिल सीकर कृषि उपज मंडी इन दिनों अव्यवस्थाओं की चपेट में है। हाल यह है कि एक ओर सरकार आमजन को शुद्ध पेयजल और बिजली की सप्लाई करने के दावे कर रही है लेकिन हकीकत यह है कि सीकर जिले की सबसे बड़ी मंडी में हजारों लोग पीने की पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि मंडी में किसानों व पल्लेदारों के लिए पानी की प्याऊ और वाटर कूलर लगे हुए हैं लेकिन इनमें से अधिकांश में पानी नहीं आता है और कई जगह तो पानी की टंकी के सूखे पेंदे लोगों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। मजबूरी में व्यापारियों को पानी के कैन मंगवाकर प्यास बुझानी पड़ रही है। इस संबंध में कई बार मंडी समिति और संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाया गया, लेकिन अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। मजबूरी में कई किसानों को महंगे दामों पर बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है, जो खासकर पल्लेदार व छोटे किसानों के लिए आर्थिक बोझ बन गया है। समस्या से आजिज किसानों और व्यापारियों ने पेयजल के स्थाई समाधान और साफ व्यवस्था नहीं करने पर धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी।
मंडी परिसर में आवंटित दुकानों के पास शौचालय बने हुए हैं लेकिन इन शौचालयों में पानी की सप्लाई नहीं होती है।
जिससे शौचालय दुर्गन्ध मारते रहते हैं। वहीं कई दुकानदारों ने तो शौचालयों पर भी ताले लगा रखे हैं और इनके आगे सामान भर रखा है। मजबूरी में किसानों या वाहन चालकों को खुले में मंडी परिसर में जाना पड़ता है।
मंडी में पीने के पानी के लिए दो ट्यूबवैल लगे हुए हैं। जिनसे परिसर में पानी की नियमित सप्लाई की जाती है। पेयजल कार्य के लिए बजट जारी किया गया है। निर्माण शुरू होने से समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा।
सुमन चौधरी, मंडी सचिव सीकर
Published on:
18 Apr 2025 11:19 am
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