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थेवा आभूषणों की विदेशों में बढ़ी डिमांड

राजस्थानी कला को अनूठी पहचान दिला रहीं प्रविता स्वर्ण आभूषणों पर उकेरी जाने वाली 400 साल पुरानी थेवा कला राजस्थान की पहचान है। उसे प्रतापगढ़ की प्रविता कटारिया पुणे में लोकप्रिय बना रही हैं। इस कला को अब वह विभिन्न प्रांतों और विदेशों तक पहुंचा रही हैं।

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Kanchan Arora

Nov 21, 2022

थेवा आभूषणों की विदेशों में बढ़ी डिमांड

थेवा आभूषणों की विदेशों में बढ़ी डिमांड

स्वर्ण आभूषणों पर उकेरी जाने वाली 400 साल पुरानी थेवा कला राजस्थान की पहचान है। उसे प्रतापगढ़ की प्रविता कटारिया पुणे में लोकप्रिय बना रही हैं। इस कला को अब वह विभिन्न प्रांतों और विदेशों तक पहुंचा रही हैं। प्रविता ने बताया कि थेवा कला के कारीगरों को नौ बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। इसी वजह से उनमें भी अपने क्षेत्र की कला के प्रति आकर्षण बढ़ा। उन्होंने दिल्ली प्रदर्शनी में थेवा कला के आभूषणों को प्रदर्शित किया। पहली बार में ही लोगों ने बहुत अच्छा रेस्पॉन्स दिया। हजारों की कीमत में आभूषण बिकने के साथ ही दर्जनों सेट्स के ऑर्डर मिल गए। इसके बाद प्रविता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रदर्शनी और ईमेल मार्केटिंग के जरिए बिजनेस को आगे बढ़ाया। वर्ष 2013 में ऑनलाइन वेबसाइट को लॉन्च किया और थेवा आभूषणों को देश-विदेश की कई हस्तियों तक पहुंचाया। ऑनलाइन बिजनेस उनके पति निलेश और दोनों बेटियां संभाल रही हैं।
हस्तशिल्प के उत्पादों की बढ़ी विदेशों में मांग
थेवा कला के अलावा प्रविता मीनाकारी ज्वेलरी, मार्बल, जेमस्टोन, लकड़ी और मेटल हस्तशिल्प के उत्पादों की भी ऑनलाइन मांग बढ़ा रही हैं। उनकी वेबसाइट पर करीब दो हजार हस्तशिल्प के प्रोडक्ट्स हैं। इसमें वेडिंग गिफ्ट, होम डेकोर, कार्पाेरेट गिफ्ट की मांग ज्यादा रहती है। उनका लक्ष्य अमरीका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया आदि में भारतीय हस्तशिल्प की मांग बढ़ाना है।