
Video: जैसलमेर में एकादशी के मौके पर निकली परंपरागत गेरें
रंग होली रे महाराज रंग होली रे महाराज, घडिय़ाले रो रे गढ़ भलो रे कोय तखनत भलो.., होंये होळी खेले, खेलिये महाराज, घडिय़ालो, ब्रजमण्डल, थांरी बोली प्यारी लागे हो...मन वाला हो म्हारा राज, थांसु म्हारें हेत थांरी मजलस घणी ऐ सोहावें, होंये होली खेले-खेले खेले हे लक्ष्मोरो नाथ खेलत फाग सुहावरणों, शिव के मन मायं बसें रे काशी आधी काशी में ब्राह्मण..। फाल्गुन का महीना और प्रकृति के कण-कण व मानस में परिवर्तन लाने में सक्षम मौन मन गाने को उत्कंठित हो उठता है। जैसलमेर में ऐसे ही माहौल के बीच एकादशी को निकाली गई गैरों के साथ ही पहली बार होली का अहसास होने लगा। स्वर्णनगरी में बुधवार को तबले की थाप पर अबीर गुलाल, कैसू फूलों का रंग, पिचकारी से सराबोर होली के फाग गीत गाते लोगों की टोलियां हर किसी के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी रही। यूं तो अष्टमी से लक्ष्मीनाथजी के मंदिर में फाग शुरू होने के साथ ही होली की रंगत जमनी शुरू हो गई थी। गेरों से गहरा हुआ होली का रंग गुलाल, अबीर उड़ाते और होली के उन्माद में मचलते व तबले की थाप पर थिरकते युवाओं ने स्वर्णनगरी को होली के रंग में रंग लिया। लक्ष्मीनाथ मंदिर में लोगों ने गुलाल खेलकर एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं दी। यहां से गैरिए गोपा चौक में जमा होने शुरु हो गए। जैसलमेर में बुधवार को परंपरागत रुप से पुष्करणा समाज की ओर से निकाली गई गैरों से होली का रंग और गहरा हुआ है। फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन निकाली गई गैरों में युवाओं का काफी उत्साह देखने को मिला। पुष्करणा समाज के विभिन्न धड़ों की ओर से निकाली गई सामूहिक गैर गोपा चौक, सदर बाजार, कचहरी रोड होती हुई मंदिर पैलेस पहुंची। शाम को विभिन्न धड़ों के मौजीज लोगों ने गैर के रुप में घर-घर जाकर गड़ीसर तालाब के समीप स्थित बगेचियों में आयोजनीय गोठों के लिए सहयोग राशि एकत्रित की।
Published on:
20 Mar 2024 09:00 pm
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