कभी एक कंपनी की सीईओ रही इंद्राणी को आरामतलब जिंदगी गुजारने की आदत पड़ चुकी थी, लेकिन यहां जेल में उसे सर के नीचे रखने को एक तकिया तक नसीब नहीं है। जिस कमरे में वह सोती है वहां पंखा तक नहीं है। चकाचौंध भरी जिंदगी की मालकिन को रोशनी के लिए सिर्फ एक रोशनदान नसीब है, जिससे बस कभी कभार हवा का कोई झोंका आ जाता है। महंगे कुजीन और पांच सितारा होटल का खाना बीते दिनों की बात हुई, अब इंद्राणी को सुबह नाश्ते में उसे चाय और पाव भाजी दी जाती है। दोपहर के खाने में उसे दाल रोटी और सब्जी ही नसीब होती है।