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CWG 2022: कुश्ती करने वाले पहलवानों का कान टेढ़ा-मेढ़ा और सूजा हुआ क्यों होता है, कारण जानिए

आपने देखा होगा कि पहलवानों के कान कुछ अलग तरह के होते हैं। किसी के कान में सूजन तो किसी के कान टेढ़े मेढ़े होते हैं। आप ने चीज हमेशा देखी होगी लेकिन इसके पीछे का कारण आप लोगों को शायद पता नहीं होगा। आइए हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देते हैं।
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पहलवानों की कान टेढ़े-मेढ़े होने का कारण

commonwealth games 2022 कुश्ती में इस समय भारत जलवा चल रहा है। भारत के तीन पहलवान गोल्ड जीत चुके हैं। कुश्ती में मेडल लाना कोई आसान बात नहीं है। खासतौर पर फ्रीस्टाइल में तो बहुत मुश्किल होता है। पहलवानी करना भी कोई आम बात नहीं। कई सालों की मेहनत के बाद ही ये काम हो पाता है। आपने एक चीज गौर की होगी कि पहलवानों के कान थोड़ा अलग दिखते हैं। हालांकि उनके शरीर की बनावट ही कुछ अलग होगी है लेकिन कान वाला हिस्सा अलग पहचाना जाता है। उनका कान टेढ़ा-मेढ़ा और सूजा हुआ होत है। किसी के कान की हड्डी भी टूटी हुई रहती है। आपने ये चीज नोटिस की होगी लेकिन इसके पीछे का कारण आपको पता नहीं होगा। आइए हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे।


जानिए इसका मुख्य कारण?


आपको बता दें कि पहलवानों के कान की हड्डी टूटी या फिरे टेढ़ी-मेढ़ी खुद से नहीं की जाती है। ये चीज खुद से हो जाती है। ये एक अलग तरह की प्रक्रिया होती है। जब हम कुछ मेहनत का काम करते हैं तो हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। एक अलग स्तर पर ये पहुंच जाता है। कान के पास जो रक्त कोशिकाएं होती है वो बहुत ही नाजुक होती है।

रेसलर जब पहला दांव लगता है तो वो सबसे पहले गर्दन से ऊपर को हाथ डालता है। इस दौरान शरीर का तापमान बढ़ा होता है। कान पर जब किसी का हाथ उस दौरान लगता है तो फिर रक्त कोशिकाएं अपने आप धीरे-धीरे फटने लग जाताी है। यहां तक की हड्डी भी टूट जाती है।

इसके बाद कान में धीरे-धीरे खून भर जाता है और उसकी बनावट कुछ अलग हो जाती है। कोई भी रेसलर इसका ईलाज नहीं कराता है। ईलान कराने के बाद और भी दिक्कत होती है। रेसलर को ऐसे ही बहुत फायदा होता है क्योंकि उन्हें बाद में कोई दिक्कत नहीं होती है। आपको बता दें इसे कॉलीफ्लॉवर ईयर नाम दिया गया है, यानी गोभी के फूल जैसा कान हो जाता है।

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बचने का उपाय

आजकल कुश्ती के नियमों में बहुत बदलाव कर दिए गए है। रेसलर्स को कम चोट आई और उसे खतरा ना हो, इसके लिए कई नई चीजें आ गई है। आजकल आपने देखा होगा कि पहलवान कानों पर हेडगियर पहनते हैं। ये कान को बचाने के लिए पहना जाता है।

दरअसल ये हेडगियर प्‍लास्‍ट‍िक के बने होते हैं। ये कानों को बहुत अच्छे से कवर करते हैं। अगर आप इसे गौर से देखेंगे तो आपके लगेगा को ये सिर को बचाने के लिए पहना जाता है लेेकिन ऐसा नहीं है। ये कान की सुरक्षा के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

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