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क्रिकेट की साख की बहाली की दिशा में प्रशासानिक सुधारों पर बनी लोढ़ा समिति की अधिकांश सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। सबसे अहम बात है यह है कि मंत्रियों, नौकरशाहों और 70 वर्ष से अधिक के लोगों के पदाधिकारी बनने पर रोक लगादी गई हैं।
साथ ही अब क्रिकेट प्रशासन में एक व्यक्ति के पास एक ही पद होगा। हालाकि बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाने और सट्टेबाजी को वैध बनाने का फैसले को संसद पर छोड़ दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर लोढ़ा समिति के सुझावों को मंजूरी दी है, वो निम्नवत है-
1. बीसीसीआई में खिलाड़ियों की एक यूनियन होगी, जिसका वित्तीय प्रबंधन बोर्ड के हाथ में रहेगा।
2. हर राज्य को एक वोट देने का अधिकार होगा।
3- बीसीसीआई में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) का एक प्रतिनिधि होना चाहिए। कैग की ओर नामित व्यक्ति के आने के बाद बीसीसीआई की अन्य सभी प्रशासनिक समितियों को खारिज कर दिया जाएगा।
4. किसी तरह की समस्या आने पर जस्टिस लोढ़ा ही समाधान करेंगे और अगर कोई रास्ता नहीं निकलता है तो सुप्रीम कोर्ट समस्या पर विचार करेगा।
क्या भारतीय फैंस को ध्यान में रखकर की गई सिफारिशः पिछले कुछ सालों में क्रिकेट में मैच फिक्सिंग के मामलों में बढ़ोतरी दिखाई दी। इसकी वजह से आईपीएल सरीखे टूर्नामेंट को धनपतियों ने व्यवसाय में तब्दील कर दिया।
फिक्सिंग की वजह से क्रिकेट की साख को ना केवल झटका लगा कि लोगों का रूझान भी आईपीएल सरीखे टूर्नामेंट से घटा। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट को सुधार समिति गठित करनी पड़ी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की ओर से लोढ़ा समिति की लगभग सभी मांगों के माने से उम्मीद जताई जानी चाहिए कि क्रिकेट का संचालन और प्रबंधन जनतांत्रिक होगा। साथ ही क्रिकेट का रोमांच बरकारार रहेगा।
Published on:
20 Jul 2016 05:35 pm
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