
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तबीयत बिगड़ी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तबीयत बिगड़ी
-मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने से निराश लौटीं
श्रीगंगानगर. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,आशा सहयोगिन,सहायिका और साथिन (ग्रामीण) का बढ़ा हुआ मानदेय लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर महिला कार्यकर्ताओं का बेमियादी अनशन व धरना शुक्रवार को भी कलक्ट्रेट के बाहर जारी रहा। इस बीच धरने पर बैठी ममता रानी,शांति देवी, केसरी देवी और विमला देवी बेहोश हो गई। उन्हें एंबुलेंस से जिला चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया। इनमें से दो महिलाओं का रक्तचाप बढ़ा हुआ पाया गया।
मानदेय सेवा पर कार्यरत महिला कार्यकर्ता 26 फरवरी से कलक्ट्रेट के बाहर धरना दे रही है। उन्होंने गुरुवार सुबह अनशन शुरू कर दिया। इसी दौरान उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। गुरुवार रात पुलिस के साथ महिला कार्यकर्ताओं की झड़प और टैंट उखाडऩे पर पुलिस के प्रति महिलाओं में आक्रोश देखा गया।
इस मौके पर जिलाध्यक्ष सीता स्वामी, सहायिका अध्यक्ष केसरीदेवी, कार्यकर्ता अध्यक्ष अर्शी खान, साथिन अध्यक्ष निर्मला बिश्नोई, जिला महामंत्री उषा वर्मा,शहरी अध्यक्ष मनीक्षा तिवारी,शंकुतला बेनीवाल,रीतू श्रीवास्तव और नीतू गोयल आदि महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन कार्यकर्ताओं को टैंट लगाने की अनुमति नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक उनका दिन-रात धरना जारी रहेगा। मुख्यमंत्री के विरोध की आंशका में सीओ इस्माइल खान व कोतवाली थाना प्रभारी हनुमाना राम महिला पुलिस के जाब्ते सहित मौके पर मौजूद रहे। सीओ ने कार्यकर्ताओं से समझाइश की लेकिन वे टस से मस नहीं हुई।
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सीएम से मिलने गई कार्यकर्ता नाराज हुई---मुख्यमंत्री दौरे के मद्देनजर गुरुवार सुबह विभागीय अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं से वार्ता की। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग के सहायक निदेशक मुकेश बारठ,महिला एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक विजय कुमार,सीडीपीओ (ग्रामीण) शक्ति सिंह,सीडीपीओ पदमपुर दयांवती सोनी के साथ अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष सीता स्वामी,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मंजू स्वामी व सहायिका अध्यक्ष केसरी देवी की सीएम से वार्ता करवाने पर सहमति हुई। आंदोलन का नेतृत्व कर रही तीनों प्रतिनिधि विभागीय अधिकारियों के साथ खाटलबाना पहुंच गई। स्वामी ने कहा कि वहां पर जाकर कहा कि आप पार्क में बैठ जाओ,सीएम आएंगे तब आप ज्ञापन दे देना। इस बात से वे खफा हो गई और सीएम आने से पहले ही बिना ज्ञापन दिए धरना स्थल लौट आई।
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---क्या हैं मांगें----
आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,आशा सहयोगिन, सहायिका,साथिन ग्रामीण को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। सुपरवाइजर पद पर बाहर से भर्ती करने की बजाए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,आशा सहयोगिन, सहायिका,साथिन ग्रामीण को लगाया जाए। साथिन को पंचायत में ग्राम सचिव,अथवा कनिष्ठ लिपिक का कोटा दिया जाए, एएनएम भर्ती में आशा सहयोगिन को 50 प्रतिशत कोटा दिया जाए,आशा और सहयोगिनों को एक विभाग में कार्यरत रखा जाए,सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,आशा सहयोगिन,सहायिका,साथिन ग्रामीण की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष लागू की जाए। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन दी जाए। राज्य की आंगनबाड़ी कार्मिकों को देश के अन्य राज्यों के समान मानदेय दिया जाए।
Published on:
07 Mar 2019 11:19 pm
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