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जौ की गाड़ी नहीं गई खाड़ी, घरेलू बाजार में मिल रहे हैं अच्छे दाम

जौ की गाड़ी इस बार भी खाड़ी नहीं गई। तीन साल पहले लगभग 2 लाख टन माल अरब देश में गया था और उससे पिछले साल 5-6 लाख टन जौ गया था।

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श्रीगंगानगर.

जौ की गाड़ी इस बार भी खाड़ी नहीं गई। तीन साल पहले लगभग 2 लाख टन माल अरब देश में गया था और उससे पिछले साल 5-6 लाख टन जौ गया था। यहां का जौ मुख्य रूप से इरान जाता था, तब यूरोपीय देशों ने उस पर प्रतिबंध लगा रखा था, यह प्रतिबंध खुलने के बाद भारत के मुकाबले वहां का पशु आहार इरान को सस्ता पड़ता है।

प्रमुख जौ कारोबारी रामावतार महिपाल के अनुसार पशु आहार में जौ सस्ता है, इस कारण खपत अच्छी है। घरेलू बाजार में मांग बनी हुई है। इसका हर साल की तरह इस बार भी स्टॉक हो रहा है। जौ अभी थोड़ा-बहुत ही आया है, इसकी आवक अब बढ़ेगी। किसान आम तौर पर जौ का स्टॉक नहीं करते, वे बेचने के लिए धान मंडियों में लाते हैं। यहां जौ न्यूनतम समर्थन मूल्य 1325 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर बिक रहा है, पूरी संभावना लग रही है कि भाव इससे नीचे नहीं जाएंगे।

टीसीडब्ल्यू कम

जानकारों के अनुसार जयपुर, हरियाणा सहित कई बेल्ट में जौ की गुणवत्ता अच्छी है, वहां से बीयर फैक्ट्री में काफी जौ जाती है लेकिन श्रीगंगानगर क्षेत्र की जौ पशु आहार के काम ही अधिक आती है। इस सीजन में यूक्रेन में जौ की अच्छी फसल हुई है। श्रीगंगानगर क्षेत्र में जौ के एक हजार दानों का वजन (थाऊजेंट काउंट वेट) कई जगह की तुलना में इस बार कम रहा है। जानकारों के अनुसार यहां टीसीडब्ल्यू 38-39 ग्राम है जबकि जयपुर क्षेत्र की 41 ग्राम और यूके्रन की 48 से 52 ग्राम है। इससे जौ की गुणवत्ता आंकी जाती है।