
सफाईकर्मी गायब, कचरा सड़कों पर और अधिकारी 'बेबस'
श्रीगंगानगर.
शहर के अधिकांश वार्डों में बिगड़ी सफाई व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। जिला कलक्टर ज्ञानाराम खुद कचरे के ढेर देखकर नगर परिषद अधिकारियों को लताड़ तक दे चुके है लेकिन मॉनीटरिंग नहीं होने से सफाई कार्मिकों से सफाई संबंधित कामकाज नहीं लिया जा रहा है।
यहां तक कि कचरा पात्र को भी साफ करने के लिए आमजन को शिकायत करनी पड़ी है, इसके बावजूद परिषद प्रशासन ने सुनवाई की बजाय चुप्पी साध ली है। कलक्टर ने एसडीएम और परिषद के राजस्व अधिकारी मिलखराज चुघ के साथ कई इलाकों का दौरा भी किया और सुधार के लिए परिषद अधिकारियों को लंबा चौड़ा पाठ भी पढ़ाया लेकिन बुधवार को ऐसी व्यवस्था का असर देखने को नहीं मिला। यहां तक कि कलक्ट्रेट के चारों कचरे के ढेर पिछले बीस दिनों से मुंह बाएं खड़े हुए थे। नगर परिषद ने बाइस वार्डो में सफाई के लिए फिर से ठेकेदार को कमान दी है। इस ठेकेदार के कामकाज शुरू होने के अड़तालीस घंटे बीतने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं आया है।
हाजिरी पूरी, फील्ड से नदारद
नगर परिषद सभापति अजय चांडक ने खुद कई बार सफाई कार्मिकों की हाजिरी चैक भी की है लेकिन हर बार फरलो पर कर्मचारी रहते है। सफाई कर्मियों की हाजिरी सफाई निरीक्षक अपने रजिस्टर में पूरी रखता है। शत प्रतिशत कर्मचारी साफ करने के लिए दावे किए जाते है, इसके आधार पर हर महीने नगर परिषद के खजाने से करीब छह करोड़ रुपए का भुगतान भी हो रहा है। लेकिन फील्ड में सफाई कर्मियों की फौज दिखाई नहीं देती। यहां तक कि स्वास्थ्य अधिकारी के फोन पर भी कई कार्मिक डयूटी करने की बजाय विपरीत जवाब दे रहे है।
हम तो कहते-कहते थक गए
कार्यवाहक आयुक्त लाजपत बिश्नोई ने स्वीकारा कि नगर परिषद के सफाई कर्मियों की संख्या पर्याप्त है लेकिन इसके बावजूद सफाई की बिगड़ी व्यवस्था से आमजन परेशान है। मॉनीटरिंग नहीं होने से सफाई कार्मिकों से काम नहीं लिया जा रहा है। सारा सिस्टम फेल हो गया है। जिन सफाई निरीक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है, वे भी सिर्फ हाजिरी बजाने के सिवाय कुछ काम नहीं कर रहे है। बिश्नोई की माने तो कचरा पात्र से कचरा उठाव के लिए भी प्रयास नहीं हो रहे है। लगाातार शिकायतों के बावजूद यह ढर्रा सुधर नहीं रहा है।
Published on:
21 Jun 2018 08:25 am
