
कबाड़ बन रहा मौसम विभाग का राडार
श्रीगंगानगर.
मौसम के बेहतरीन चित्र लेना और इसके बाद उनका बेहतरीन विश्लेषण। करीब सात वर्ष पहले तक श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर मौसम विभाग के पास ऐसा राडार था जिससे आसानी से मौसम की स्थिति के चित्र लिए जा सकते थे तथा उनका विश्लेषण भी हो सकता था लेनिक अब ऐसा नहीं है। इस राडार की पर्याप्त देखरेख नहीं होने तथा बिगडऩे के बाद विभाग की ओर से इस की मरम्मत पर ध्यान नहीं देने से अब यह कबाड़ में बदलता जा रहा है। विभागीय अधिकारी इसकी मरम्मत फेज अनुसार होने तथा इसके आउट डेटेड की बात तो कहते हैं लेकिन समय रहते इसकी देखरेख नहीं होने को उच्च स्तर का मामला कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
सीमावर्ती क्षेत्र के कारण लगाया राडार
उस समय राजस्थान में केवल श्रीगंगानगर और जैसलमेर में ही ये ये दो राडार लगाए गए थे। इसके अलावा गुजरात के भुज में एक राडार लगा था। प्रदेश के इन दो इलाकों में ये राडार लगाने के पीछे एक कारण इन इलाकों का सीमावर्ती क्षेत्र में होना भी था लेकिन समय के साथ यह राडार खराब हुआ तो किसी ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
सात वर्ष से खराब
करीब सात वर्ष पूर्व इस राडार ने वर्ष 2010 में काम करना बंद कर दिया। इसके बाद इसकी मरम्मत के लिए विभागीय अधिकारियों को जानकारी दी गई लेकिन वहां से अब तक केवल राडारों की मरम्मत के लिए अलग-अलग फेज में व्यवस्था होने के लिए कहा गया है।
वर्ष 1987-88 में हुआ था स्थापित
करीब तीस वर्ष पूर्व 1987-88 में स्थानीय मौसम विज्ञान केंद्र में राडार स्थापित किया गया था। उस समय तत्कालीन आवश्यकताओं के अनुसार इससे मौसम के चित्र मिलते और उन्हीं चित्रों के माध्यम से मौसम के पूर्वानुमान लगाए जाते थे। इसका लाभ जहां एक ओर मौसम विभाग को मिलता वहीं इलाके में विशेष हवाई उड़ाने होने की स्थिति में भी इसका उपयोग किया जाता।
फेज अनुसार मरम्मत
इस राडार की मरम्मत बाद के फेज में की जाएगी। जिस समय यह राडार स्थापित हुआ था उस समय इससे मौसम के चित्र मिलते थे। अब इसके लिए उपग्रह से प्राप्त चित्रों का उपयोग कर विश्लेषण किया जाता है। वर्ष 2010 से यह राडार काम नहीं कर रहा है।
एमएल रिणवां,
प्रभारी, मौसम विज्ञान केंद्र
Published on:
12 Sept 2017 07:49 am
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