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गीतों में राजस्थानी संस्कृति की स्वर लहरियां बिखेर रही लोक भजन मंडलियां, यू ट्यूब पर भी लाखों सब्सक्राइबर

जिले के सूरतगढ़ तहसील के टिब्बा क्षेत्र हर गांव अपनी विशेष पहचान लिए हुए है। लेकिन क्षेत्र के गांव मोकलसर तथा बछरारा की खास पहचान हैं। इन गांवों की विशेषता यहां के लोक कलाकारों की भजन मंडलियां है। जो वर्षों से राजस्थानी संस्कृति की स्वर लहरियां बिखेर रही हैं

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Rajasthani traditional culture

राजस्थानी लोकगीत प्रस्तुत करती भजन मंडली।

श्रीगंगानगर. जिले के सूरतगढ़ तहसील के टिब्बा क्षेत्र हर गांव अपनी विशेष पहचान लिए हुए है। लेकिन क्षेत्र के गांव मोकलसर तथा बछरारा की खास पहचान हैं। इन गांवों की विशेषता यहां के लोक कलाकारों की भजन मंडलियां है। जो वर्षों से राजस्थानी संस्कृति की स्वर लहरियां बिखेर रही हैं और प्रदेश की ग्रामीण संस्कृति के दर्पण के रूप में कार्य कर रही है। भले ही यह लोक भजन मंडलियां राजस्थानी संस्कृति की पुरातन जड़ों से जुड़ी हो लेकिन इनमें आधुनिकता का समावेश भी देखा जा सकता है। राजस्थानी संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए इन भजन मंडलियों ने अपने अपने यू-ट्यूब चैनल भी बना रखे हैं। जिनके लाखों की संख्या में सब्सक्राइबर हैं। यह लोक भजन मंडलियां देवी-देवताओं के जागरण लगाने के साथ-साथ राजस्थानी सभ्यता, संस्कृति व पारंपरिक लोग गीतों, लोक देवताओं के गीतों, चेतावनी भजनों, भारत के इतिहास के महापुरुषों, धरती के शूरवीरो का गुणगान करते हैं। इन भजन मंडलियों की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है। प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी इन भजन मंडलियों को लोक देवताओं के जागरण में भजन गाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इन भजन मंडलियां भजनों के साथ कलाकार राजस्थानी नृत्य की छटा भी बिखेरते हैं।

यह हैं प्रसिद्ध लोक भजन मंडलियां

राजियासर टिब्बा क्षेत्र की प्रसिद्ध भजन मंडलियों में बृजलाल शर्मा, बजरंग लाल शर्मा, सुरेंद्र कुमार सैन, मदनलाल जैपाल, मुकेश जैपाल, किशनलाल चानणराम, खेतपाल, रेवंतराम दुपगा, किशनलाल मोट, दूदाराम तथा बछरारा गांव के चतरुराम, महेंद्र कुमार स्वामी, राजू, रतासर गांव में तेजपाल सिंह सहित अन्य प्रसिद्ध कलाकार हैं। जो कि अपने भजनों, लोक गीतों व कथाओं, चेतावनी भजनों से जनजागरण का कार्य भी करते हैं। मोकलसर गांव के स्वर्गीय कलाकार सोहनलाल मोकलसर वाले के माताजी के भजन आज भी लोग बड़े चाव से सुनते हैं। यहां की भजन मंडलियां हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में दूर-दूर तक जागरण लगाने जाती हैं। सबसे खास बात तो यह है कि इन भजनों व लोक गीतों की रचनाएं महान संतों एवं लेखकों की ओर से की गई थी। जो कि लिखित में नहीं होते हैं। यह केवल मौखिक रूप से पीढ़ी दर पीढ़ी से चले आ रहे है।

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इन लोक देवता के जागरण सबसे अधिक

यह ठेठ ग्रामीण भजन मंडलियां विशेष रूप से कंवर केसरो जी, गोगाजी, हरिराम जी, वीर तेजाजी, हनुमानजी, भैरूजी, भभूता सिद्ध जी, बाबा रामदेवजी, गोंसाई जी, माता रानी के भजन गायन के लिए प्रसिद्ध हैं। जागरण के साथ ही यह भजन मंडलियां राजस्थान तथा अन्य प्रान्तों में हुए प्रतापी शासकों, महान संतों एवं पुरुषों की गाथाओं का गुणगान भी करते हैं। इसके साथ कथाओं की बात करें तो, इनमें नानी बाई रो मायरो, राजा मोरध्वज, राजा मानसिंह की कथा, नृसिंह भगत की कथा, राजा भर्तृहरि, लव कुश, जगदेव भक्त की कथा, मीराबाई, प्रहलाद भक्त, राजा बलि की कथा, धानू भक्त की कथा, दूदा भक्त की कथा तथा गुरु गोरखनाथ की कथा समेत अनेक कथाओं का भी गुणगान भी करते हैं। इसके अलावा राजस्थानी इतिहास के अनेक रोचक घटनाएं से भी प्रस्तुत करते हैं।

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चेतावनी भजनों के लिए भी प्रसिद्ध हैं भजन मंडलियां

जागरण के साथ ही यह भजन मंडलियां अनेक चेतावनी भजनों का गुणगान कर जनजागरण का काम भी करती हैं। चेतावनी भजनों में "हंसा सुंदर काया रो मत करजे अभिमान, आखिर एक दिन तुझको जाना रे मालिक के दरबार", "अरे जग में मिठो बोल रे मानवी, जग में मिठो बोल कोई थोड़ा जीवाणों, भाई रे", "चाहे जतन कर ले हजार, हंस उड़ जाणों रे, ओ दुर्लभ मिनख शरीर फिर नहीं आणो रे", "थोड़ी सी जिंदगानी खातिर नर तू कै कै तूफान करै, एक मिनट का नहीं भरोसा वर्षों का सामान करै", "कांईं कारण आयो रे बंदा, कांईं धंधे लाग्यो रे, मानखों जावे रे अनमोल रो" आदि खासे प्रसिद्ध हैं। किसान खेतों में काम करते समय व पशुपालक अपनी गाय तथा भेड़ -बकरियों को चरवाते हुए बड़े शौक से भजन सुनते हैं।