
गांधी टोपी का क्रेज हर किसी को
जनसंपर्क के दौरान समर्थक शौक से पहनते हैं
चुनाव सामग्री के साथ गांधी टोपी की भी मांग
श्रीगंगानगर. विधानसभा चुनाव में इस बार गांधी टोपी का बोलबाला है। प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ मजबूत समझे जा रहे निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थकों में भी गांधी टोपी का क्रेज है और वह जनसंपर्क के दौरान शौक से इसे सिर पर पहन कर निकलते हैं। इस बार गांधी टोपी उम्मीदवारों की ओर से चुनाव सामग्री के संबंध में दिए जाने वाले ऑर्डर का भी हिस्सा बन चुकी है।
सफेद रंग की गांधी टोपी कांग्रेस के अग्रिम संगठन सेवादल की पहचान रही है। कांग्रेसी नेताओं ने भले ही गांधी टोपी पहनना छोड़ दिया, सेवादल के कार्यकर्ता अब भी पार्टी के आयोजनों में गांधी टोपी पहने नजर आते हैं। बड़े नेता के आगमन पर उसे दी जाने वाली सलामी के समय भी सेवादल कार्यकर्ता सफेद ड्रेस के साथ इसी रंग की गांधी टोपी धारण करते हैं।
सफेद के अलावा खाकी रंग की गांधी टोपी नेताजी सुभाष चंद्र बोस पहनते रहे जबकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारी और स्वयंसेवक विभिन्न आयोजनों में आज भी काले रंग की गांधी टोपी धारण करते हैं।
गांधी ने नहीं बनाई : गांधी टोपी का आविष्कार महात्मा गांधी ने नहीं किया था।
यह तो गांधी के जन्म से पहले ही अस्तित्व में थी। उत्तरप्रदेश, गुजारात, पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक, बिहार और महाराष्ट्र में इसका प्रचलन काफी पुराना है। इन राज्यों में मध्य एवं उच्च वर्ग के लोग बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के इसे पहनते आए हैं। गांधी ने इस टोपी को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया सो टोपी का नाम गांधी टोपी पड़ गया।
दरअसल गांधीजी जब दक्षिण अफ्रीका में वकालत करते थे तब अंग्रेजों के अत्याचारों से तंग आकर सत्याग्रह का मार्ग अपनाया था। उस समय अंग्रेजों ने भारतीयों के लिए फिंगरप्रिंट देने का नियम बना रखा था। गांधीजी ने इस नियम का विरोध करते हुए गिरफ्तारी दी।
जेल में भी गांधीजी को अंग्रेजों के भेदभाव का शिकार होना पड़ा। वहां जेल में भारतीय कैदियों के लिए एक विशेष प्रकार की टोपी पहनना जरूरी था। जेल से छूटकर गांधीजी ने इस टोपी को हमेशा के लिए धारण करना और प्रसारित करना शुरू कर दिया ताकि भारतीयों को अपने साथ हो रहा भेदभाव याद रहे। आगे चलकर इस टोपी का नाम गांधी टोपी पड़ गया।
आप ने अपनाया
अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के विरोध में और लोकपाल की मांग को लेकर दिल्ली में आंदोलन शुरू किया तो उनके देखादेखी अन्य आंदोलनकारी भी गांधी टोपी लगाने लगे। बाद में उनके सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाई तो नेता और कार्यकर्ता गांधी टोपी लगाए नजर आने लगे। वैसे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भी लाल रंग की गांधी टोपी लगाते हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में तो गांधी टोपी सभी के लिए स्वीकार्य हो गई। भले ही उसके रंग अलग-अलग हों।
Published on:
29 Nov 2018 12:45 pm
