
सीमा पर देश का अंतिम गांव, यहां वाशिंदे दस किलोमीटर चलने के बाद कर पाते हैं मतदान
-हर बार मतदान के लिए करनी पड़ती है मशक्कत
भारत के आखिरी छोर पर स्थित है चक 37 पीएस। यह गांव भारत पाक सीमा पर तारबंदी से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। रियासतकाल में बसे इस गांव के अधिकांश लोग अशिक्षित हैं। गांव के लोग आजादी के बाद से ही मताधिकार का उपयोग तो करते आ रहे है लेकिन मतदान इस गांव के लोगों के लिए आसान नहीं है।
ग्रामीणों को मतदान के लिए आज भी सडक़ मार्ग से करीब आठ से दस किलोमीटर की दूरी तय कर खाटां स्थित मतदान केन्द्र पर जाना पड़ता है। हर बार ग्रामीण मतदान करते है लेकिन आजादी के सात दशक बाद भी ग्रामीणों की मतदान के लिए आठ से दस किलोमीटर चलकर जाने की दूरी कम नहीं हो पाई है। भीषण गर्मी में लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान के लिए लोगों को रेतीले और गर्म धोरों को पार कर गांव खाटां पहुंचना पड़ता है। वहीं कुछ लोग ट्रेक्टर ट्रॉलियां लेकर सडक़ मार्ग से गांव खाटां पहुंचते है। पैदल मतदान के लिए जाने वाले लोग उबड़-खाबड़ मार्ग पर करीब चार किलोमीटर लंबा सफर तय कर मतदान केन्द्र पर पहुंचते हैं जबकि वाहनों पर जाने वाले मतदाताओं को दस किलोमीटर की दूरी तय कर मतदान केन्द्र पर पहुंचना पड़ता है।
चुल्हा चौका बाद में, पहले मतदान
सीमा से सटे इस गांव का शिक्षा का स्तर निम्न है लेकिन इसका असर मतदान पर दिखाई नहीं देता। भीषण गर्मी में भी गांव की महिलाएं मतदान के लिए तैयार थीं। मतदान के लिए महिलाओं ने चुल्हा चौका तक छोड़ दिया। महिलाओं ने बताया कि पहले वोट देकर आऐंगे फिर घर का काम करेंगे। मतदान के लिए ग्रामीण तीन गांवों चक 36 पीएस, 35 पीएस व 33 पीएस को पार कर खाटां पहुंचते है। भीषण गर्मी में जीप पर सवार होकर आई एक महिला मतदाता ने बताया कि घर के बाकी काम तो हमेशा ही करते है लेकिन मतदान का मौका पांच वर्ष में एक बार ही मिलता है। एक अन्य महिला ने बताया कि मतदान केन्द्र दूर है लेकिन घर का सारा काम छोडकऱ मतदान के लिए जा रहे है।
Updated on:
06 May 2019 02:52 pm
Published on:
06 May 2019 02:52 pm
