
वैश्विक बाजार में गंगानगरी किन्नू की डिमांड, पत्रिका फोटो
Orange Gold Kinnow: ठंडी हवाएं, सुबह की हल्की धुंध और दिन-रात के तापमान का संतुलन, इन्हीं तीन प्राकृतिक कारकों ने इस बार गंगानगरी किन्नू को ऐसा रंग, स्वाद और मिठास दी है कि वह सचमुच ऑरेंज गोल्ड बन गया है। राजस्थान पत्रिका के अपनी उपज, अपना उद्योग अभियान के तहत जब जिले की प्रमुख फसल की पड़ताल की गई, तो स्पष्ट हुआ कि श्रीगंगानगर न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में किन्नू उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।
श्रीगंगानगर का किन्नू अब सिर्फ फल नहीं, बल्कि किसानों की पहचान, जिले की अर्थव्यवस्था और निर्यात का मजबूत आधार है। राज्य सरकार ने भी पंच गौरव के तहत गंगानगरी किन्नू का चयन कर इसकी महत्ता को स्वीकार किया है।
श्रीगंगानगर में किन्नू का सफर करीब 59 वर्ष पुराना है। वर्ष 1962 में करतार सिंह नरूला द्वारा लाए गए पौधों से शुरू हुई यह कहानी आज हजारों किसानों की आजीविका से जुड़ चुकी है। दोमट मिट्टी, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और ठंडा मौसम यहां के किन्नू को विशिष्ट बनाते हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस सीजन मौसम पूरी तरह अनुकूल रहा, जिससे उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का अनुमान है। यही वजह है कि जनवरी-फरवरी की तुड़ाई से पहले ही बागों के सौदे शुरू हो गए हैं।
जिले में उत्पादित किन्नू का बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर ताजा फल के रूप में खपत होता है। शेष किन्नू को ग्रेडिंग, वैक्सिंग और पैकिंग के बाद देशभर में भेजा जाता है। रीको औद्योगिक क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक प्रोसेसिंग यूनिट्स हैं, जहां किन्नू की सफाई और वैक्सिंग कर उसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता,चेन्नई जैसे बड़े फल बाजारों तक पहुंचाया जाता है।
यहीं से थाईलैंड, मलेशिया, इंग्लैंड, भूटान, बांग्लादेश और नेपाल तक निर्यात होता है। बाहर के राज्यों और देशों में इससे जूस, स्क्वैश, फ्लेवर्ड ड्रिंक और अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
प्रगतिशील किसान विजय यादव बताते हैं कि किसानों से किन्नू 25 से 30 रुपए प्रति किलो के भाव में खरीदा जा रहा है। प्रोसेसिंग, पैकिंग और परिवहन के बाद यही किन्नू खुदरा बाजार में 40 से 50 रुपए किलो तक बिकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिले में जूस, स्क्वैश, मुरब्बा और ड्राय प्रोडक्ट आधारित प्रोसेसिंग उद्योग विकसित हों तो वैल्यू एडिशन से किसानों की आय में कई गुना बढ़ोतरी संभव है।
गंगानगरी किन्नू अपनी उपज, अपना उद्योग की सशक्त मिसाल है। यदि स्थानीय प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को और बढ़ावा मिले, तो यह ऑरेंज गोल्ड न केवल किसानों की आय दोगुनी करेगा, बल्कि श्रीगंगानगर को वैश्विक फूड मैप पर और मजबूती
से स्थापित करेगा।
प्रीतिबाला,उप निदेशक,उद्यान विभाग,श्रीगंगानगर
Updated on:
04 Feb 2026 01:21 pm
Published on:
04 Feb 2026 01:21 pm
