
आफत बनती जा रही जलकुंभी
जैतसर.
करीब एक पखवाड़े के बाद गंगनहर की करणीजी वितरिका में चलाये गये सिंचाई पानी के साथि प्रवाहित होकर आ रही जलकुंभी किसानों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। शनिवार देर रात को बड़ी मात्रा में जलकुंभी के वितरिका में बहकर आने से सरुपसर पुलिया पर डाफ लगने से करणीजी वितरिका में बह रहा सिंचाई पानी ओवरफ्लो होकर वितरिका के किनारों से बाहर बहने लगा। जिससे एकबारगी वितरिका के टूटने का खतरा बन गया।
करणीजी वितरिका में डाफ लगने एवं ओवरफ्लो होकर बहने की जानकारी मिलने पर जल उपयोक्ता संगम अध्यक्ष दलजीत सिंह रंधावा, ग्राम सेवा सहकारी समिति अध्यक्ष कुलदीप सिंह, पीएलडीबी अध्यक्ष इन्द्रजीत सिंह रंधावा सहित अन्य किसान मौके पर पहुंचे एवं जेसीबी व अन्य संसाधनों की मदद से जलकुंभी को बाहर निकलवाने के प्रयास प्रारंभ किये। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जलकुंभी को बाहर निकाल सिंचाई पानी के प्रवाह को सुचारु किया जा सका।
जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता शिवराम मीणा ने बताया कि पंजाब क्षेत्र से सिंचाई पानी के साथ बड़ी मात्रा में जलकुंभी बहकर आ रही है। जो कि नीचे पुल एवं पुलियाओं पर एकत्रित होकर सिंचाई पानी के प्रवाह को अति धीमा कर देती है। जिससे नहरों एवं वितरिकाओं के टूटने का खतरा बना रहता है। विभाग की ओर से सिंचाई पानी प्रवाह के दौरान वितरिकाओं की निगरानी भी की जाती है। जिससे वितरिकाओं को टूटने से बचाया जा सके।
फसल को लेकर बढ़ी चिंता
जानकीदासवाला.
बरसात के अभाव तथा सिंचाई पानी की मार को लेकर किसानों में चिंता बढ़ती जा रही है। चार में से एक समूह में पानी चलाने की आशंका को लेकर किसान संकट में आ गए हैं। किसान विष्णुराम, जगदीशराम, राजेन्द्र प्रसाद, रेवन्तराम ने बताया कि नरमा कपास की बिजाई के समय भी किसानों को सिंचाई पानी नही दिया गया। किसानों ने कर्ज लेकर कुओं से फसलों का बिजान किया था।
वहीं भूमिपुत्रों पर मानसून भी मेहरबान नहीं हो रहा है। बिना बरसात के फसलें मुरझाने लगी हैं। डीजल के बढ़ते भावों से कुंओं से सिंचाई करना भी कठिन हो गया है। संगीता, पदमपुरा, पांच एसडी, करणीसर, रघुनाथपुरा, 13 व 11 एसडी, सादकवाली में भी फसलें प्रभावित हो रही है।
Published on:
06 Aug 2018 09:30 am
