श्रीगंगानगर. भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाक तस्करों की ओर से ड्रोन की मदद से हेरोइन तस्करी करने की लगातार हो रही घटनाओं से निपटने के लिए बीएसएफ देसी श्वानों की मदद लेगी। इसके लिए अच्छी नस्ल के देसी श्वानों को बीएसएफ की सीमा चौकियों पर रखा गया है। अभी इन्हें भारतीय सीमा में तारबंदी के पास रात्रि नाकों पर तैनात होने वाले जवानों के साथ भेजा जा रहा है। जवानों के साथ ये श्वान रात भर जाग कर सरहद की रखवाली करते हैं। सीमा पार कोई हरकत होने पर श्वान भौंक कर रात्रि नाकों पर तैनात जवानों को चौकन्ना कर देते हैं।
पाकिस्तानी तस्करों और पंजाब के ड्रग माफिया ने हेरोइन तस्करी के लिए जब से श्रीगंगानगर और बीकानेर सेक्टर में डिलीवरी प्वाइंट तय किए हैं तब से ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में हेरोइन गिराए जाने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। श्रीगंगानगर और बीकानेर सेक्टर में अकेले जनवरी माह में ड्रोन से हेरोइन गिराए जाने या सीमा पार से आए ड्रोन के भारतीय सीमा में घुसपैठ के प्रयास की दस घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें ज्यादातर घटनाएं श्रीगंगानगर सेक्टर की हैं।
सीमा चौकियों पर रखे गए श्वान शाम ढलते ही जवानों के साथ रात्रि नाकों पर चले जाते हैं। रात्रि नाकों पर तैनात किए जाने वाले जवानों के लिए रात में चाय आदि की व्यवस्था रहती है। श्वानों के लिए जवान दो रोटियां ले जाते हैं ताकि जब उन्हें चाय मिले तो श्वान यह नहीं सोचे कि उसे तो कुछ मिला ही नहीं। रात्रि नाके का समय समाप्त होने पर जवानों के साथ ही श्वान सीमा चौकी पर आ जाते हैं और दिन भर आराम करते हैं। अब इन्हें सीमा चौकियों पर ड्रोन उड़ाकर उसका पता लगाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन की आवाज सुनकर श्वान भौंकने लगते हैं। पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन आने पर उसकी आवाज सुनकर यह भौंकेंगे तो जवान अलर्ट हो जाएंगे और फायरिंग कर ड्रोन को गिराने का प्रयास करेंगे।
विदित रहे कि श्वान चाहे किसी भी नस्ल का हो उसकी वफादारी तथा सूंघने व सुनने की क्षमता समान होती है। सुरक्षा एजेंसियों के डॉग स्क्वायड में विदेशी नस्ल के जो श्वान शामिल किए जाते हैं, वे काफी महंगे होते हैं और उनके प्रशिक्षण पर भी बड़ी राशि खर्च होती है। इस बात को ध्यान में रखकर बीएसएफ के बीकानेर सेक्टर के उप महानिरीक्षक पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ ने नया प्रयोग किया। उन्होंने देसी नस्ल के श्वानों के स्वस्थ पिल्लों को इकट्ठा करवाया और उन्हें बीकानेर सेक्टर में श्रीगंगानगर और बीकानेर जिले से सटी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बनी सीमा चौकियों पर भिजवा दिया। अब यह पिल्ले बड़े हो चुके हैं और सीमा चौकियों पर तैनात जवानों से घुल मिल गए हैं। बीकानेर सेक्टर में श्रीगंगानगर जिले का भी हिस्सा शामिल है।
इस बीच, बीएसएफ के बीकानेर सैक्टर उपमहानिरीक्षक पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि ड्रोन की समस्या से निपटने में देसी श्वानों की मदद लेने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। श्वानों की सुनने की शक्ति भी गजब की होती है। ड्रोन ऊंचाई पर भी होगा तो श्वान को उसका पता लग जाएगा। भौंक कर वह जवानों को सचेत कर देगा। जब तक एंटी ड्रोन तकनीक नहीं मिलती तब तक यह प्रयोग बुरा नहीं।