
आंखें चैक करानी हैं तो दो सौ किमी का करो सफर
श्रीगंगानगर.
अगर अनूपगढ़ के किसी व्यक्ति ने अपनी आंखें चैक करानी हैं तो उसे जिला मुख्यालय तक करीब दो सौ किमी का सफर करना पड़ेगा। यह स्थिति एक दो महीने नहीं, बल्कि दस सालों से बनी हुई है। जिले के पांच ऐसे विधानसभा क्षेत्र के तहसील मुख्यालय हैं जहां नेत्र रोग विशेषज्ञों के पद खाली हैं।
इलाके के एक मात्र कैबिनेट राज्य मंत्री सुरेंद्रपाल सिंह टीटी के श्रीकरणपुर क्षेत्र के अलावा विधायक शिमला बावरी के अनूपगढ़ में, विधायक राजेन्द्र भादू के सूरतगढ़ तहसील मुख्यालय पर, विधायक गुरजंट सिंह बराड़ के सादुलशहर तहसील मुख्यालय और विधायक सोनादेवी बावरी के रायसिंहनगर तहसील मुख्यालय पर भी एक-एक पद नेत्र रोग विशेषज्ञों के थे, लेकिन ये पद खाली पड़े हैं। यहां तक कि श्रीकरणपुर सीएचसी में कभी भी नेत्र रोग विश्ेाषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति तक नहीं हुई है।
यही हाल सादुलशहर का है। यहां भी कभी ऐसे चिकित्सक को नियुक्त करने के लिए जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सोचा तक नहीं है। सूरतगढ़ में गत पांच साल से, अनूपगढ़ में गत दस सालों से और रायसिंहनगर में छह साल से नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक का पद खाली है। इसके विपरीत पदमपुर सीएचसी ऐसा है, जहां पद नहीं है फिर भी एक चिकित्सक डा. दिनेश भारद्वाज को लगाया गया है।
मोबाइल क्लिनिक पर रोगियों की संख्या दस हजार पार
जिला मुख्यालय पर सीएमएचओ कार्यालय में एक मोबाइल क्लिनिक संचालित हो रही है। इस क्लीनिक पर नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. कृष्णा गेदर बारह सालों से लगातार उपचार कर रही हैं। रोगियों ने इस महिला चिकित्सक पर इतना विश्वास जमाया है कि क्लिनिक पर रोगियों की संख्या दस हजार सालाना हो गई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के रिकॉड के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 में 10 हजार 306 रोगियों का उपचार किया गया था। वहीं वर्ष 2017-18 में यह संख्या 9 हजार 740 तक पहुंच गई। इसके साथ साथ ऐसे भी रोगी हैं जिनका पंजीयन नहीं होता है। चिकित्सक डा. गेदर का कहना है कि अनुभव का आधार मानकर पुराने लोग उनके पास आंखें चैक करवाने आते हैं।
चिकित्सालय में हर महीने बढ़ रहा आंकड़ा
राजकीय जिला चिकित्सालय में नेत्र रोग का उपचार कराने के लिए हर महीने आंकड़े बढ़ रहे हैं। चिकित्सालय के रिकॉर्ड के अनुसार इस साल जनवरी महीने में 4434, फरवरी में 5207 रोगी, अप्रेल में 6439 रोगी, मई में 7202 रोगी का उपचार किया गया है। हर साल चिकित्सालय में बीस से बाइस हजार औसतन रोगियों की जांच हो रही है। वहीं चिकित्सालय में नेत्र रोग संबधित ऑपरेशन भी कराए हो रहे हैं।
Published on:
24 Jun 2018 10:07 am
