
गंगानगर लोकसभा सीट का रिजल्ट बन गया है पहेली
Lok Sabha Elections 2024 : लोकसभा चुनाव 2024 के तहत राजस्थान की 25 सीटों पर चुनाव हो गए हैं। गंगानगर लोकसभा सीट के परिणाम पर रोजना चर्चाएं हो रही हैं। गंगानगर लोकसभा सीट का परिणाम एक पहेली बन गया है, जिसे राजनीतिक पंडित भी सुलझा नहीं पा रहे। मतदान के बाद हार-जीत को लेकर नित नए समीकरण बन रहे हैं। एक दिन भाजपा प्रत्याशी प्रियंका बैलाण की पक्की जीत बताई जा रही है तो दूसरे दिन कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप इंदौरा की जीत के दावे होने लगते हैं। जहां तक भाजपा और कांग्रेस के समर्थकों की बात है तो वह अपनी-अपनी जीत के दावे मतदान होने के तुरंत बाद से लेकर अब तक किए जा रहे हैं।
चुनाव परिणाम को लेकर असमंजस की स्थिति कम मतदान को लेकर बनी है। कांग्रेस समर्थक कम मतदान अपने पक्ष में बता रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में 60.97 प्रतिशत मतदान हुआ था और कांग्रेस के भरतराम मेघवाल विजयी हुए। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि भाजपा की जीत मतदान प्रतिशत ज्यादा होने पर ही होती है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 73.17 तथा वर्ष 2019 के चुनाव में 74.77 प्रतिशत मतदान हुआ तो भाजपा के निहालचंद जीते। कम मतदान को अपने पक्ष में बता रहे कांग्रेस समर्थकों के तर्क को भाजपा समर्थक काट रहे हैं। उनका कहना है कि 2004 के लोकसभा चुनाव में तो गंगानगर संसदीय क्षेत्र में 54.07 प्रतिशत ही मतदान हुआ था तो भाजपा प्रत्याशी कैसे जीत गए।
गंगानगर लोकसकभा सीट पर इस बार 66.59 प्रतिशत मतदान हुआ है। कांग्रेस इसे पिछले दो लोकसभा चुनाव की तुलना में कम बता कर अपनी जीत मान रही है। कांग्रेस के संगठन महामंत्री श्यामलाल शेखावाटी का कहना है कि पिछले दो चुनावों में मोदी का जादू मतदाताओं के सिर चढ़ कर बोला था, इसलिए मतदान प्रतिशत ज्यादा रहा और भाजपा प्रत्याशी भारी मतों के अंतर से विजयी रहे। इस बार मोदी का जादू उतना नहीं चला तो मतदान प्रतिशत कम रहा। यह कांग्रेस को फायदा देगा। शेखावाटी का कहना है कि चार माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से पांच पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी और आठ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को मिले मतों से एक लाख से भी अधिक मत कांग्रेस को मिले थे। इस बार के चुनाव में न किसी की आंधी थी और न किसी की हवा। ऐसे में पलड़ा कांग्रेस का ही भारी रहा है।
हार-जीत के दावे सट्टा बाजार भी करता है। लेकिन जो लोग सट्टा बाजार की समझ रखते हैं, उन्हें भलीभांति पता है कि इस बाजार में उमीदवारों के भाव उपर-नीचे होने का फार्मूला दोनों हाथों में लड्डू रखने की तर्ज पर तय होता है। नवबर में हुए विधानसभा चुनाव में सट्टा बाजार किसकी जीत बता रहा था और जीता कौन यह किसी से छुपा हुआ नहीं। लोकसभा चुनाव में कौन जीतेगा, यह ग्रामीण मतदाताओं की ओर डाले गए मत तय करेंगे। गंगानगर संसदीय क्षेत्र में 357843 शहरी मतदाताओं ने वोट डाले तो 1041845 ग्रामीण मतदाताओं ने मतदान किया। शहरी और ग्रामीण मतदाताओं के मतों में बड़ा अंतर है। ग्रामीण मतदाताओं का रुझान जिस पार्टी या उमीदवार की तरफ रहा है, वही जीत हासिल कर लोकसभा में पहुंचेगा।
कांग्रेस के दावे के विपरीत भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रतन गणेशगढ़िया का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की योजनाओं और नीतियों से मतदाता आज भी प्रभावित हैं। देश में ही नहीं विदेशों में मोदी का जो कद है, वैसा कद कांग्रेस के किसी नेता का नहीं। लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने इस बार भी मोदी को प्राथमिकता दी है। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में गंगानगर संसदीय क्षेत्र में 54.07 प्रतिशत मतदान होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी को जीत हासिल हुई तो इस बार भी जीत हासिल होगी। गणेशगढ़िया का कहना है कि भाजपा का बूथ प्रबंधन इतना मजबूत था कि मतदान के लिए ज्यादातर मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया। कांग्रेस को तो बहुत से मतदान केन्द्रों पर पोलिंग एजेंट ही नहीं मिले।
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Published on:
28 Apr 2024 03:16 pm
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