
पन्नू का तंज: पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बने गहलोत,पन्नू का तंज: पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बने गहलोत,पन्नू का तंज: पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बने गहलोत
पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बने गहलोत ने अपनों को बिसराया
- पार्टी में हुई उपेक्षा से नाराज पूर्व सांसद शंकर पन्नू का गुस्सा फूटा, अब थामेंगे भाजपा का दामन
#Ashok Gehlot गंगानगर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट के दावेदार पूर्व सांसद शंकर पन्नू, टिकट नहीं मिलने से ज्यादा पार्टी में हुई उपेक्षा से नाराज हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खास रहे पन्नू का कहना है कि पुत्र मोह (वैभव की टिकट के लिए) में धृतराष्ट्र बने गहलोत ने उन लोगों को बिसरा दिया, जिन लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रविवार को जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल से मिलने के बाद पन्नू ने पत्रिका से बातचीत में कहा, जिस पार्टी की पचपन साल तक सेवा की, उससे अलग होने का समय आ गया है। इस पार्टी को अब समर्पित कार्यकर्ताओं की बजाय चापलूसों की जमात चाहिए। पन्नू तीन अप्रेल को जयपुर में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
पूर्व सांसद ने बताया कि टिकट को लेकर उनकी पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष गोविन्दसिंह डोटासरा, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखविन्द्रसिंह रंधावा और विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली से बात हुई तो उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि आप कहो तो अपने गांव चला जाता हूं, आप कहो तो दिल्ली चला जाऊंगा। इस पर गहलोत उन्हें एक कमरे में ले गए और इतना ही कहा कि मुझे मुख्यमंत्री बनाने वाले आप हो। लेकिन अब मैं भूत हो गया हूं। गहलोत को 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बनाने में अपनी भूमिका का खुलासा करते हुए कहा कि उस समय परसराम मदेरणा और शीशराम ओला जैसे दिग्गज नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे। गहलोत के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए द्वारका प्रसाद बैरवा, महेश जोशी, डॉ. निजाम और मैंने रात भर कांग्रेसी विधायकों के दरवाजे खटखटा कर समर्थन की चिट्ठी पर 116 विधायकों के हस्ताक्षर करवाए। अगले दिन समर्थन की चिट्ठी माधवराव सिंधिया को सौंपी तब जाकर गहलोत मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे। अब उन्हें अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य की चिंता है।
यहां पर भी उपेक्षा हुई
पन्नू ने बताया कि उपेक्षा केवल प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं हुई, जिला स्तर पर भी हुई। गंगानगर लोकसभा क्षेत्र से कुलदीप इंदौरा को टिकट दिए जाने के बाद, जिला कांग्रेस कमेटी से आज तक उनके पास कोई फोन नहीं आया। ऐसे में पार्टी छोड़ने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा था। पन्नू का कहना है कि रविवार को विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, श्रीयादे माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद टाक सहित भाजपा के अन्य नेताओं के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई तो जो सम्मान उन्होंने दिया, वह उस पार्टी में कभी नहीं मिला, जिसकी सेवा पांच दशक से अधिक समय तक की।
Published on:
01 Apr 2024 08:44 pm
