
प्रदेशभर के सरकारी अधिकारी या कार्मिक अब सोशल मीडिया या प्रेस नोट आदि जारी कर सरकार विरोधी या किसी राजनीतिक दलों या संगठन या संस्थाओं की आलोचना संबंधी कॉमेंट नहीं कर पाएंगे। यदि कोई अधिकारी या कार्मिक ऐसा करता है तो उसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जाएगा। राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग के शासन सचिव डॉ. कृष्ण कान्त पाठक की ओर से जारी किए गए आदेश में सरकारी अधिकारियों और कार्मिकों को अपनी सीमा में रहने की बात कही गई है। ऐसा नहीं करने पर अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियम 1968 के नियम 3 तथा 7 एवं राजस्थान सिविल सेवाएं (आचरण) नियम 1971 के नियम 3, 4 तथा 11 में अनुशासहीनता की श्रेणी में माना जाएगा।
अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियम, 1968 के नियम, 03 तथा 07 एवं राजस्थान सिविल सेवाऐं (आचरण) नियम, 1971 के नियम, 03 व 04 तथा 11 के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी अनुचित व अशोभनीय आचरण नहीं करेगा, कर्तव्यनिष्ठा एवं कार्यालय की गरिमा बनाए रखेगा और सरकार के किसी कदम या नीति की आलोचना नहीं करेगा। इसके बावजूद प्रेस व सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध मनगढन्त तथा अनर्गल आरोप प्रचारित या प्रसारित किए जाते हैं जिससे कार्यालय की छवि धूमिल होती है।
यह सही है कि राज्य के कार्मिक विभाग ने अधिकारियों और कार्मिकों को सोशल मीडिया में किसी की आलोचना संबंधित बयानबाजी नहीं के संबंध में आदेश जारी किया है। अधिकारी और कार्मिक भी ऐसे विवाद में नहीं पड़ना चाहिए। सरकार इस संबंध में गंभीर कदम उठा रही है।
-डॉ.मंजू, जिला कलक्टर श्रीगंगानगर
Updated on:
25 Oct 2024 09:39 am
Published on:
23 Sept 2024 04:59 pm
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