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हवा में घुली जहर, नारों में दबकर रह गई सफाई

हवा में घुली जहर, नारों में दबकर रह गई सफाईजगजीत सिंह की गजल 'ये दौलत भी ले लो, ले शोहरत भी ले लो भले छीन लो

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Poisoned in air

हवा में घुली जहर, नारों में दबकर रह गई सफाई

श्रीगंगानगर.

हवा में घुली जहर, नारों में दबकर रह गई सफाईजगजीत सिंह की गजल 'ये दौलत भी ले लो, ले शोहरत भी ले लो भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन... क्षेत्र की सफाई के मामले में सटीक बैठती है। बुजुर्गों की नजर में सात दशक पहले हवा में ताजगी थी लेकिन अब जहर घुली है। कागज के लिफाफे से जहां घर बैठे लोगों को रोजगार मिलता था। प्रदूषण नहीं होता था लेकिन अब यह प्लास्टिक की थैलियों ने ले लिया है। सफाई के लिए अकेले सरकार जिम्मेदार नहीं बल्कि हम भी है। बुजुर्गों का कहना था कि कचरा इतना अधिक हो गया है कि संक्रमण होता है जो बीमारियों को जन्म देने लगता है।


शहर में स्वच्छता नारों के होर्डिंस तक सीमित हो गई है। यही वजह है कि स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने हमारे इलाके को 400 में से 359 वें स्थान पर रखा है। इस रैंकिंग से साफ जाहिर है कि इलाका स्वच्छता के मामले में लगातार पिछड़ रहा है।


साइकिल पर करते थे मॉनिटरिंग अब कहां


विनोबा बस्ती निवासी 79 वर्षीय रामेश्वरलाल सारस्वत का कहना है कि नगर परिषद के सफाई निरीक्षक एक-एक गली का खुद जायजा लेने के लिए साइकिल पर आते थे। कचरे का नामोनिशान नहीं था। वाहन चंद घरों में होते थे लेकिन अब हर घर में एक एक सदस्य के पास है। इस कारण धुंए से वायु प्रदूषण हो गया है। जागरुकता कागजों में सिमट गई है।
प्लास्टिक संस्कृति हावी
जवाहरनगर सेक्टर छह निवासी 85 वर्षीय रामसिंह यादव का मानना है कि बदलते परिवेश में सफाई कोसों दूर हो गई है। घर की सफाई के लिए नौकर रखने पड़ रहे हैं। बागवानी का रिवाज अब लगभग खत्म सा हो गया है। प्लास्टिक संस्कृति इतनी हावी हो गई है कि एक वैवाहिक कार्यक्रम में दो ट्रॉली प्लास्टिक का उठाव करवाया जाता है। घरों के आगे पेड़ लगाने की हौड़ दम तोड़ चुकी है।

गोबर का इस्तेमाल कम
बुजुर्गों का कहना है कि रसोईघर में गैस का चूल्हा आ गया लेकिन गोबर का इस्तेमाल कम हो गया। ऐसे में हर घर में मच्छर अधिक हो गए हैं। फोगिंग मशीन के छिड़काव से भी मच्छरों का खात्मा नहीं हो रहा। बाजार से मच्छरनाशी दवा लानी पड़ रही है।


संयुक्त परिवार की कमी से बढ़ी गंदगी
वार्ड 48 धानक मोहल्ला निवासी 90 वर्षीय चंदूलाल ढलोड़ का कहना है कि संयुक्त परिवार जैसे-जैसे खत्म हो रहे है वैसे गंदगी अधिक हो रही है। एकल परिवारों में सफाई के प्रति जागरुकता में कमी आई है। खान-पान से लेकर रहन सहन में विलासता हावी होने लगी है। लोगों की औसत उम्र कम हो रही है। जरूरत है सफाई को अपने स्वास्थ्य के प्रति सावचेत होने की।


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