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जिला चिकित्सालय पर साल दर साल बढ़ता सीजेरियन प्रसव का दबाव

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जिला चिकित्सालय पर साल दर साल बढ़ता सीजेरियन प्रसव का दबाव


पीएचसी और सीएचसी पर सुविधा नहीं...

जिला चिकित्सालय पर साल दर साल बढ़ता सीजेरियन प्रसव का दबाव

-पौने तीन साल में 2733 सीजेरियन और 14 हजार 139 सामान्य प्रसव

श्रीगंगानगर. राजकीय जिला चिकित्सालय में पौने तीन साल में 2733 सीजेरियन प्रसव हुए हैं। जहां वर्ष 2017 में 866 प्रसव हुए। वर्ष 2018 में आठ माह में 890 सीजेरियन प्रसव हो चुके हैं और नवंबर व दिसंबर में 250 सीजेरियन प्रसव होने की संभावना है। पहले की तुलना में इस साल राजकीय जिला चिकित्सालय में सीजेरियन प्रसव में इजाफा हुआ है। जिला चिकित्सालय में पौने तीन माह में 14 हजार 139 सामान्य प्रसव हुए हैं। एक साल में चिकित्सालय में पांच हजार सामान्य प्रसव हुए हैं। जहां वर्ष 2017 में 5044 सामान्य प्रसव हुए थे वहीं आठ माह में 2018 में अक्टूबर तक 4113 सामान्य प्रसव हुए हैं।

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सीजेरियन प्रसव वर्ष प्रसव

2016 977

2017 866

2018 890

पौने तीन साल-2733

सामान्य प्रसव का गणित

वर्ष प्रसव
2016 4982

2017 5044

2018 4113

पौने तीन साल-14,139
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प्रति माह सीजेरियन प्रसव

जनवरी 79

फरवरी 73
मार्च 61

अप्रेल 72

मई 72

जून 87
जुलाई 98

अगस्त 112

सितंबर 125

अक्टूबर 111
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स्टाफ पर बढ़ा काम का बोझ

श्रीगंगानगर जिले में 56 पीएचसी, 17 सीएचसी व आधा दर्जन डिस्पेंसरी पर सीजेरियन प्रसव की सुविधा नहीं है। वहां पर विशेषज्ञ डॉक्टर का अभाव है। इस कारण वहां पर सीजेरियन प्रसव नहीं करते हैं। इस कारण मजबूरी में पीएचसी, सीएचसी और डिस्पेंसरी से सीजेरियन प्रसव करवाने वाली गर्भवती महिलाएं जिला चिकित्सालय श्रीगंगानगर ही आती है या फिर निजी चिकित्सालय में चले जाते हैं। गरीब परिवार के लोग अधिकांश राजकीय जिला चिकित्सालय श्रीगंगानगर में ही सीजेरियन प्रसव करवाते हैं। जबकि जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ डॉक्टर है लेकिन पर्याप्त संसधान की कमी की वजह से दिक्कत आती है। गर्भवती महिलाएं ज्यादा आने पर विशेषज्ञ डॉक्टर,नर्सिंग स्टाफ का काम बहुत अधिक बढ़ जाता है। चिकित्सालय के पॉस्टऑपरेटिव वार्ड में प्रसूताओं को बहुत बार एक बैड पर दो-दो प्रसूताओं को लैटाया जाता है। इस कारण इन प्रसूताओं को बहुत ज्यादा दिक्कत से दो-चार होना पड़ता है। सीजेरियन प्रसव होने पर प्रसूता को आठ दिन तक चिकित्सालय में भर्ती रहना पड़ता है।

जिला चिकित्सालय में पहले की तुलना में इस साल सीजेरियन प्रसव की संख्या में इजाफा हुआ है। इसका मुख्य कारण जिले की पीएचसी, सीएचसी पर सीजेरियन प्रसव की सुविधा नहीं होना है। निजी अस्पताल में सीजेरियन प्रसव महंगा है जबकि राजकीय चिकित्सालय में नि:शुल्क है।

-डॉ. पवन सैनी, पीएमओ, राजकीय जिला चिकित्सालय, श्रीगंगानगर।सीजेरियन प्रसव

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