
Farmers selling vegetables
श्रीगंगानगर.
फल-सब्जी विक्रेता किसानों से नाराज हैं। सोमवार को यहां फल-सब्जी मंडी में जुटे इन लोगों का कहना था कि किसान आंदोलन की आड़ में उन्हें परेशान किया जा रहा है। आम उपभोक्ताओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में एक वक्ता ने तो कुछ किसानों पर दादागिरी करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि फल-सब्जी छीनी जा रही है, दुव्र्यवहार किए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। मंगलवार सुबह 9 बजे कलक्ट्रेट पहुंच जिला कलक्टर से दो टूक बात करने का निर्णय इस बैठक में किया गया।
भाजपा नेता शिव स्वामी का बैठक में कहना था कि आंदोलन करने वालों को व्यावहारिक होना चाहिए। जिला फल-सब्जी विक्रेता यूनियन के पूर्व प्रधान देशवीर गौड़ ने कहा कि अधिकांश विक्रेता रोज कमाने, रोज खाने वाले हैं। लम्बी हड़ताल के कारण उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। यूनियन के अध्यक्ष किशोरी पचेरवाल, साजिद खान, बाबू खां रिजवी सहित काफी जने बैठक में मौजूद थे।
मंडी परिसर सूना
जिला मुख्यालय की फल-सब्जी मंडी सोमवार को बिलकुल सूनी रही। कृषि उपज मंडी समिति (फल-सब्जी) के अनुसार फल-सब्जियों की आवक शून्य रही, ऐसे में नीलामी का सवाल ही नहीं उठता। इस मंडी में ठीक एक साल पहले, 4 जून, 2017 को फल-सब्जियों की आवक लगभग चार हजार क्विंटल की थी। अकेला प्याज ही एक क्विंटल आया था।
हो रहा है नुकसान
मंडी में गांव बंद के आह्वान से पहले की फल-सब्जियां आई हुई पड़ी हैं। बात की जाए प्याज की तो मंडी परिसर में एक मोटे अनुमान के अनुसार लगभग 5 हजार क्विंटल प्याज बिक्री के इंतजार में पड़ा है। पल्लेदार रमेश के अनुसार मंडी में माल खरीदने वालों का टोटा होने से विक्रेताओं को भारी नुकसान हो रहा है। इस दिशा में सरकार को शीघ्र कोई कदम उठाना चाहिए।
Published on:
04 Jun 2018 09:54 pm
