
रेलवे में आरक्षण फुल, जनरल डिब्बों में जगह नहीं
श्रीगंगानगर.
स्कूल कॉलेजों में गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही यात्री गाडिय़ों में भीड़ बढ़ गई है। 30 जून तक अधिकांश ट्रेनों में आरक्षण फुल चल रहा है। वहीं पैसेंजर गाडिय़ों में सवारियों को जनरल डिब्बों में बैठने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। सूरतगढ़ से कैनाल लूप होते हुए हनुमानगढ़ और सादुलपुर जाने वाली पैसेंजर गाडिय़ों में यात्री भार काफी अधिक है। यात्रियों को बैठने की सीट की बात तो दूर खड़े होने को भी जगह नहीं मिल रही है। श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में समर स्पेशल ट्रेनों का संचालन न होने से रेल यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।
श्रीगंगानगर से चलने वाली हमसफर, हरिद्वार इंटरसिटी, नांदेड एक्सप्रेस, दिल्ली इंटरसिटी, जम्मूतवी एक्सप्रेस, सरायरोहिल्ला एक्सप्रेस, उद्यान आभा एक्सप्रेस के वातानुकूलित ट्रेनों में यात्रियों को आरक्षण नहीं मिल रहा है। सभी ट्रेनों में 30 जून तक आरएसी की भी टिकट नहीं मिल रही है। कई ट्रेनों में तो नो रूम शो हो रहा है। इसका मतलब है यात्री को वेटिंग टिकट भी नहीं मिलेगा। बॉक्स
पैंसेजर गाडिय़ों में यात्रियों का सबसे बुरा हाल है।
सूरतगढ़ से गंगानगर होते हुए हनुमानगढ़-सादुलपुर जाने वाली यात्री ट्रेनों में महज 8 डिब्बे लग रहे हैं। किसी भी कोच के सिक होने पर उस डिब्बे को हटा दिया जाता है। यात्रियों की परेशानी को देखते हुए पैंसेजर गाडिय़ों में डिब्बों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए मगर रैक की कमी के चलते रेल प्रशासन चाहकर भी यात्रियों की मदद नहीं कर पा रहा है। इन पैंसेजर गाडिय़ों में भीड़ बढऩे का एक कारण कम किराया होना भी है। मसलन भादरा के लिए बस का किराया 120 रुपए हैे जबकि ट्रेन से यह किराया 60 रुपए से अधिक नहीं है।
क्या होता है आरएसी
रेलवे कंफर्म सीटों के उपरांत यात्रियों को आरएसी (रिजरवेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) में बर्थ उपलब्ध कराता है। आरएसी का टिकट मिलने पर यात्री को साइड लोअर बर्थ की आधी सीट उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वह कुछ हद तक परेशानी से बच सके। एक स्लीपर कोच में नौ साइड लोअर बर्थ होती हैं। इनमें आठ बर्थों पर सोलह यात्रियों को आरएसी टिकट जारी किया जाता है। अगर अंतिम समय तक आरएसी कंफर्म नहीं होता है तो दो यात्रियों को एक बर्थ पर ही बैठना पड़ता है। इतना अवश्य है कि अगर कोई यात्री अपनी बर्थ पर नहीं आता है तो कोच टीटीई सबसे पहले आरएसी यात्री को ही बर्थ देगा। जिस यात्री का आरएसी नंबर सबसे कम होगा, उसे पहले सीट दी जाएगी।
पैंसेजर गाडिय़ों में 9 कोच (डिब्बे) लगाए जा रहे हैं। यह सही है कि यात्री भार लगातार बढ़ रहा है। किसी भी कोच के खराब हो जाने पर यात्रियों को परेशानी होनी स्वाभाविक है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत करवा दिया गया है।
- दिनेश त्यागी, स्टेशन अधीक्षक, श्रीगंगानगर
Published on:
02 Jun 2018 08:30 am
