
लोकसभा चुनाव: श्रीगंगानगर भाजपा प्रत्याशी को बगावती तेवर का कार्ड भी फायदे का सौदा
श्रीगंगानगर। भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए वर्तमान सांसद निहालचंद को फिर से चुनाव में उतारने के लिए दांव खेला है। पिछली बार निहालंचद का विरोध था लेकिन केन्द्र की यूपीए सरकार के खिलाफ देशभर में हुई खिलाफत और मोदी लहर के कारण निहालचंद को जीत मिल गई। बगावती तेवर का कार्ड भी सांसद निहालचंद के लिए फायदेमंद रहा है।
भाजपा में कई बार बगावती रुख अपनाया, लेकिन वे हमेशा किस्मत के धनी साबित हुए। वर्ष 1998 में पार्टी ने उन्हें रायसिंहनगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था और चुनाव अधिकारी ने उन्हेें पार्टी का चुनाव चिन्ह कमल आवंटित भी कर दिया लेकिन नाटकीय घटनाक्रम में पार्टी ने यह सीट समझौते के तहत हरियाणा राष्ट्रीय लोकदल को दे दी और उन्हें मैदान से हटने को कहा।
इनकार करने पर उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया, पर वे डटे रहे और चुनाव जीत भी गए। उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनाव में भी बागी तेवर दिखाया। पार्टी ने रायसिंहनगर से उनके दावे को खारिज कर बलवीर लूथरा को उम्मीदवार बनाया, तो उन्होंने अपने भाई को निर्दलीय लड़ाने का ऐलान कर दिया लेकिन पार्टी के दिग्गज नेताओं के समझाने पर उनको यह निर्णय बदलना पड़ा।
जिस उम्र में लोग राजनीतिक का सफर शुरू करते उस उम्र में निहालचंद चार बार सांसद चुने जाने की उपलब्धि हासिल कर चुके है। अब उनकी आयु सिर्फ 47 साल की है। सासद निहालचंद लगातार सातवीं बार चुनाव लड़ेगे। इससे पहले छह बार चुनाव लड़ा और चौथी बार सांसद बने हैं. इस आंकड़े के लिहाज से वे सूबे के सबसे अनुभवी सांसदों में हैं, लेकिन सियासी कद के तौर पर कई लोग उन्हें परिपक्व नेता नहीं मानते।
इसके बावजूद पांच साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी टीम में इस सांसद को चुना और उनको केन्द्रीय मंत्रिमंडल में केन्द्रीय राज्य मंत्री का पद तक दिया था। भाजपा की टिकट की दौड़ में पूर्व विधायक ओपी महेन्द्रा, भाजपा प्रदेश महामंत्री कैलाश मेघवाल भी शामिल थे लेकिन उनकी निहालचंद के मुकाबले उनके पास इतनी एप्रोच नहीं थी। सांसद निहालचंद ने पिछली बार कांग्रेस के दिग्गज मास्टर भंवरलाल मेघवाल को 2,91,000 से ज्यादा वोटों से हराया था।
अपने पिता का रिकार्ड भी निहालचंद तोड़ चुके है, उनके पिता बेगाराम चौहान दो बार सांसद रहे जबकि वे खुद चार बार सांसद रह चुके है। अब पांचवीं बार जीतने के लिए भाजपा से टिकट पाने में सफल रहे है।
रायसिंहनगर के पास बाजूवाला की एक ढाणी में जन्मे निहालचंद के पिता बेगाराम चौहान एक बार विधायक और दो बार सांसद रहे थे। बेगाराम की मृत्यु के बाद राजनैतिक विरासत बड़े बेटे रामस्वरूप ने संभाली और विधायक चुने गए।
उसी दौर में निहालचंद ने राजनैतिक पारी शुरू की और सडक़ हादसे में रामस्वरूप की मौत से एक हफ्ते पहले सिर्फ 24 वर्ष की उम्र में पंचायत समिति के प्रधान बने। अगले वर्ष 1996 में 11वीं लोकसभा के चुनाव में गंगानगर से जीतकर उन्होंने देश में सबसे कम उम्र के सांसद होने का गौरव हासिल किया। उसके बाद से तो हर लोकसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बनाने का सिलसिला शुरू कर दिया, जो अब तक थमा नहीं है।
Updated on:
22 Mar 2019 09:32 pm
Published on:
22 Mar 2019 09:32 pm
