
Pulse Processing Unit : फोटो AI
Pulse Processing Unit : राजस्थान के कृषि प्रधान श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ सहित राज्य के सभी 37 जिलों में अब दलहन की केवल खेती ही नहीं, बल्कि उसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का मजबूत ढांचा भी तैयार होगा। केंद्र सरकार के दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत प्रत्येक जिले में न्यूनतम 300 किलोग्राम प्रति घंटे क्षमता वाली एक आधुनिक दलहन प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाई स्थापित की जाएगी। इस योजना पर राज्य में कुल 9.25 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जबकि प्रत्येक इकाई के लिए अधिकतम 25 लाख रुपए तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
किसानों को केवल कच्ची उपज बेचने तक सीमित न रखकर मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से जोड़ना है। इससे स्थानीय स्तर पर दाल की सफाई, ग्रेडिंग, छिलाई, पॉलिशिंग, कलर सॉर्टिंग और पैकेजिंग जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और सहकारी संस्थाओं को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
योजना के तहत कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ), क्लस्टर फेडरेशन लेवल (सीएलएफ), प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियां (पैक्स), अन्य पंजीकृत संस्थाएं तथा व्यक्तिगत उद्यमी आवेदन कर सकेंगे। व्यक्तिगत आवेदक की आयु 21 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। समूह श्रेणी के आवेदकों का कम से कम दो वर्ष पूर्व से पंजीकृत एवं सक्रिय होना आवश्यक है।
कृषि अनुसंधान अधिकारी जगजीत सिंह संधू ने बताया कि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे दलहन उत्पादक क्षेत्रों में इस योजना से स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा प्रदेश में दालों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ने से आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत जिले में 300 किग्रा प्रति घंटे क्षमता की दलहन प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाई स्थापित करने के लिए पात्र आवेदकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। पात्र परियोजनाओं को 33 प्रतिशत अथवा अधिकतम 25 लाख रुपए तक का अनुदान मिलेगा। इससे दलहन की वैल्यू चेन मजबूत होगी, स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित होंगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।
डॉ. सतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निवेशक कृषि (विस्तार), श्रीगंगानगर
योजना के अनुसार पात्र परियोजना लागत का 33 प्रतिशत अथवा अधिकतम 25 लाख रुपए (जो भी कम हो) तक अनुदान दिया जाएगा। इसमें मशीनरी, उपकरण तथा भवन, गोदाम एवं भंडारण अवसंरचना के निर्माण की लागत शामिल होगी। भूमि, बिजली, ऊर्जा, अम एवं कार्यबल पर होने वाला खर्च अनुदान के दायरे में नहीं आएगा।
परियोजना के लिए बैंक ऋण लेना अनिवार्य होगा तथा व्यक्तिगत लाभार्थी को अपनी ओर से न्यूनतम 15 प्रतिशत मार्जिन मनी की व्यवस्था करनी होगी। अनुदान दो चरणों में जारी किया जाएगा।
मशीनरी एवं भवन निर्माण के बाद भौतिक सत्यापन होने पर 50 प्रतिशत राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के आधार लिंक बैंक खाते में भेजी जाएगी। शेष 50 प्रतिशत अनुदान इकाई के सफल संचालन के बाद जारी होगा। जिला स्तर पर गठित दलहन मिशन जिला संचालन समिति (डीएससीपी) चयन, भौतिक सत्यापन और निगरानी का कार्य करेगी।
Published on:
27 Jun 2026 08:49 am
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