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श्रीगंगानगर।
संस्कृति बचाने के लिए संस्कृत भाषा का अध्ययन और अध्यापन जरूरी है। संस्कृत के प्रयोग से मनुष्य में तुतलाहट दूर हो जाती है।यह बात रविवार को चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय में श्रीगंगानगर जनपद संस्कृत सम्मेलन को संबोधित करते हुए संस्कार भारती के मंत्री तगसिंह राजपुरोहित ने कही। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए राजपुरोहित ने कहा कि संस्कृत हमें संस्कार देती है और इससे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। संस्कृत भारती जोधपुर प्रांत की ओर से आयोजित संस्कृत सम्मेलन के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि एडीएम सिटी वीरेन्द्र वर्मा ने कहा कि संस्कृत केवल रोजगार परक भाषा ही नहीं है बल्कि यह जीवन शैली को श्रेष्ठ बनाने की भाषा है।
वर्मा ने संस्कृत के कई कवियों मनु, कालीदास, भातृहरि आदि के श्लोकों का उल्लेख किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष पं. तनसुख राम शर्मा और जिला संघ चालक अमरचंद बोरड़ ने भी विचार रखे। गोदारा गल्र्स कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. प्रदीप मोदी ने कहा कि संस्कृत मूल भाषा है, मगर स्कूल और कॉलेजों में संस्कृत भाषा पढऩे वाले विद्यार्थियों की संख्या निरंतर कम हो रही है। सूरतगढ़ में विज्ञान संकाय में अध्ययनरत शालिनी उपाध्याय ने गायत्री मंत्र पर योग ? नृत्य कर वाहवाही लूटी।
विदेशों में भी बोली जाती है संस्कृत
संस्कृत सम्मेलन के दूसरे सत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित और संस्कृत मनीषी डॉ. सत्यव्रत वर्मा ने कहा कि संस्कृत विश्व की एक मात्र ऐसी भाषा है जो मानव जाति की एकता की कल्पना करती है। संस्कृत भाषा केवल भारत ही नहीं बल्कि कई दूसरे देशों में बोली जाती है। भाजपा के प्रदेश मंत्री कैलाश मेघवाल ने कहा कि वे विद्यालयों में संस्कृत के रिक्त पदों पर व्याख्याताओं की नियुक्ति करवाने के प्रयास करेंगे। सम्मेलन में यूआईटी के अध्यक्ष संजय महिपाल, धर्म संघ संस्कृत महाविद्यालय के प्रबंधक कल्याण स्वरूप ब्रह्मचारी, भाजपा नगर मंडल के अध्यक्ष प्रदीप धेरड़ आदि ने भी भाग लिया।
Published on:
03 Dec 2017 08:33 pm
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