
पुलिस को निर्देश देते जज। Image Source: ChatGpt
श्रीगंगानगर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरतगढ़ की अदालत ने न्यायिक आदेश की पालना नहीं होने पर पुलिस प्रशासन के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि सात घंटे के भीतर न्यायालय के आदेशानुसार प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, तो जिला पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर और पुलिस उप-अधीक्षक सूरतगढ़ को सीधे तौर पर न्यायालय की अवहेलना के लिए जिम्मेदार माना जाएगा। एसीजेएम की अदालत में परिवादी रामकृष्ण जाखड़ की ओर से अधिवक्ता तुषार कामरा उपस्थित हुए। मामले में पूर्व आदेश की अनुपालना को लेकर सुनवाई हुई।
इस दौरान एसएचओ सूरतगढ़ शहर की ओर से कोर्ट एलसी विजयपाल ने लिखित स्पष्टीकरण पेश किया, जबकि निर्धारित समय तक जिला पुलिस अधीक्षक की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायालय के आदेश के बावजूद थानाधिकारी सूरतगढ़ की अेार से आदेश की पालना नहीं की गई। अदालत ने यह भी कहा कि केवल किसी आदेश के खिलाफ रिवीजन या निगरानी याचिका दायर कर देने मात्र से न्यायालय के आदेशों की अवहेलना नहीं की जा सकती।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि इस प्रकार न्यायिक आदेशों की अवहेलना को बढ़ावा दिया गया, तो संवैधानिक व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया पर आमजन का विश्वास डगमगा सकता है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके आदेश पर अब तक किसी उच्च न्यायालयकी ओर से रोक नहीं लगाई गई है, इसलिए आदेश प्रभावी है और उसकी पालना आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान परिवादी ने अदालत के समक्ष कहा कि बार-बार आदेशों के बावजूद FIR दर्ज नहीं होने से उनका न्याय व्यवस्था से विश्वास उठता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें और उनकी पत्नी को लगातार जान-माल का खतरा बना हुआ है तथा अब तक कोई सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई है। अदालत ने इन तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को गंभीर माना। न्यायालय ने कहा कि जिस थानाधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं, वही यदि आदेश की पालना नहीं कर रहा है तो निष्पक्ष अनुसंधान पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के एक हालिया न्यायिक दृष्टांत का हवाला देते हुए जिला पुलिस अधीक्षक को अनुशंसा की कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ परिवाद में नामजद किया गया है और यदि वे सूरतगढ़ शहर थाने में ही तैनात हैं, तो उनका तत्काल प्रभाव से अन्यत्र स्थानांतरण किया जाए, ताकि अनुसंधान प्रभावित न हो। अदालत ने कहा कि 'कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता' और वर्तमान परिस्थितियां इसी सिद्धांत को चरितार्थ करती नजर आ रही हैं। अदालत ने कोर्ट मुंशी विजयपाल को निर्देश दिए कि वे आदेश की जानकारी तुरंत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक मौखिक रूप से पहुंचाना सुनिश्चित करें। साथ ही आदेश की प्रतिलिपि डिप्टी एसपी सूरतगढ़ के माध्यम से जिला पुलिस अधीक्षक को तत्काल तामील करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
'इस प्रकरण की जांच सूरतगढ़ सीओ की ओर से की जा रही है। पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट सूरतगढ़ न्यायालय के समक्ष शुक्रवार को रखी जाएगी।' -दीपक कुमार शर्मा, एडिशनल एसपी श्रीगंगानगर
Published on:
22 May 2026 04:56 pm
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