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वेटिंग की आड़ में प्राइवेट नर्सिंग होम में पहुंचा दिए ढाई हजार मरीज

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bhamashah yojna

वेटिंग की आड़ में प्राइवेट नर्सिंग होम में पहुंचा दिए ढाई हजार मरीज

श्रीगंगानगर.

सरकारी अस्पताल में नौकरी करते हुए प्राइवेट नर्सिंग होम के लिए रोगियों को भिजवाने के गोरखधंधे में राजकीय जिला चिकित्सालय के पांच चिकित्सकों की भूमिका सामने आई है। इन पांच चिकित्सकों को भामाशाह स्वास्थ्य योजना के गड़बड़झाले में संलिप्त बताया जाता है।


चिकित्सा एवं स्वाथ्य विभाग जयपुर के निर्देशों पर विशेष जांच दल के जांच करने से पहले चिकित्सालय प्रशासन की ओर से गठित आंतरिक जांच कमेटी की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य उजागर किया गया है।


इस जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि भामाशाह स्वास्थ्य योजना में राजकीय जिला चिकित्सालय में 4200 में से 2800 रोगियों को इन पांचों चिकित्सकों ने यह कहते हुए प्राइवेट नर्सिंग होम में भिजवा दिया कि चिकित्सालय में ऑपरेशन के लिए तीन-तीन महीने तक इंतजार करना पड़ेगा।


इन चिकित्सकों की कारस्तनी की वजह से चिकित्सालय में ऑपरेशन योग्य मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती गई और वेटिंग लिस्ट बना दी गई। इस लिस्ट की आड़ में चिकित्सालय में पंजीकृत 2800 मरीजों को प्राइवेट नर्सिंग होम भिजवाने के लिए पांचों चिकित्सकों की अहम भूमिका रही।

चिकित्सालय प्रशासन की माने तो अब इन पांचों चिकित्सकों के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ आपराधिक मामला दर्ज कराया जा सकता है।


उपनिदेशक ने शुरू की जांच
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के उपनिदेशक डॉ.संदीप अग्रवाल की अगुवाई में जांच दल ने बुधवार को भामाशाह स्वास्थ्य योजना की गड़बडि़यों की जांच शुरू की। उन्होंने ‘राजस्थान पत्रिका’ से विशेष बातचीत में बताया कि अब तक २८०० एेसे रोगियों की सूची बनाई गई है, जिन्होंने राजकीय जिला चिकित्सालय में पंजीयन करवाया। एेसे रोगियों के बयान लिए जाएंगे।


पीएमओ-डिप्टी कंट्रोलर से लिया फीडबैक
जांच अधिकारी ने पीएमओ डा. सुनीता सरदाना और उपनियंत्रक डा.प्रेम बजाज से फीडबैक लिया। पीएमओ ने भी अपने स्तर पर एक आंतरिक जांच रिपोर्ट तैयार की है, इस रिपोर्ट के संबंध में भी उपनिदेशक से जानकारी साझा की।


ऐसे गायब होते रहे चिकित्सालय से मरीज
भामाशाह स्वास्थ्य योजना में नि:शुल्क ऑपरेशन का दावा किया गया लेकिन निजी चिकित्सालयों के संचालकों ने दवाइयों के नाम पर प्राइवेट हॉस्पिटल संचालकों ने दवाइयों की एवज में आठ हजार रुपए की कथित वसूली कर ली। ऐसे सैकड़ों मरीज है जिन्होंने चिकित्सालय में अपना पंजीयन करवाने के लिए दस रुपए की पर्ची कटवाई लेकिन वार्ड तक पहुंचने के बजाय उन्हें निजी अस्पतालों में ले जाया गया। वहां दवाइयों और विभिन्न जांच के नाम पर कथित वसूली भी की, दूसरी ओर इंश्योरेंस कंपनी से इस योजना से बीस से बाईस हजार रुपए प्रति मरीज नर्सिंग होम संचालकों ने क्लेम उठाया। यह खुलासा आंतरिक जांच में हुआ है।

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