
old rituals in village
श्रीगंगानगर। जिले के ग्रामीण क्षेत्र में अब भी धमाका कुई का इस्तेमाल हो रहा है। जबकि जिला परिषद प्रशासन की ओर से जिले को ओडीएफ बनाने का दावा किया जा रहा है, यह हकीकत बांसवाड़ा जिले के आठ अधिकारियों की सदस्य टीम ने जब जांच की तो सामने आई। इस टीम ने पिछले एक सप्ताह के बाद अपनी रिपोर्ट बनाकर जिला प्रशासन को सुपुर्द की है। टीम में शामिल अधिकारियों का कहना था कि पूरे जिले में ९९ ग्राम पंचायतों का सैम्पल सर्वे किया गया है। इनमें रायसिंहनगर क्षेत्र गांव श्यामगढ़ में सबसे बुरी हालत है। शौचालय के नाम पर महज खानापूर्ति हुई है। वहीं सादुलशहर क्षेत्र के कई गांवों में लोगों ने अपने घरों में शौचालय बना लिए लेकिन निर्माण के एवज में भुगतान तक नहीं हो पाया हे।
टीम अधिकारियों का कहना था कि पुराने ढर्रे पर बनी धमाका कुई का चलन अब भी अधिकांश गांवों में जारी है। हालांकि वहां शौचालय बनाने के लिए जिला परिषद के माध्यम से प्रयास शुरू किए गए है। इन टीम ने श्रीविजयनगर और पदमपुर पंचायत समिति क्षेत्र को छोडक़र शेष पंचायत समिति क्षेत्र के चुनिंदा गांवों का दौरा किया है। इन इन इलाकों में हुआ सर्वे जिले में ९ पंचायत समितियों में कुल ३३६ ग्राम पंचायतें है। इसमें बांसवाड़ा जिले की इस टीम ने सर्वे अभी ९९ ग्राम पंचायतों का किया है। इस टीम ने अलग अलग पंचायत समिति क्षेत्र के ग्राम पंचायतों में जाकर शौचालय निर्माण के निर्धारित मापदंडों के अनुरुप चैकिंग की।
इसमें श्रीगंगानगर पंचायत समिति क्षेत्र के १३, श्रीकरणपुर पंचायत समिति क्षेत्र के ७, रायसिंहनगर पंचायत समिति क्षेत्र के २५, अनूपगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र के १३, घड़साना पंचायत समिति क्षेत्र के १८, सादुलशहर पंचायत समिति क्षेत्र के २, सूरतगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र के २१ कुल ९९ ग्राम पंचायतों का निरीक्षण किया। जबकि श्रीविजयनगर और पदमपुर पंचायत समिति क्षेत्र के ग्राम पंचायतों का दौरा नही किया गया है। रिपोर्ट जिला परिषद को सोँपी जिला परिषद के जिला समन्वयक अरविन्द सिंह ढिल्लो ने बताया कि बांसवाड़ा से आई टीम ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। इसमें ९९ गांवों में शौचालय निर्माण के संबंध में जांच के प्रत्येक पहलूओं के बारे में बताया गया है। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन और राज्य सरकार को भिजवाई जाएगी।
Published on:
19 Sept 2017 02:05 pm
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