
srikaranpur administrative system is low
श्रीकरणपुर. खान राज्यमंत्री सुरेन्द्रपालसिंह टीटी के विधानसभा मुख्यालय पर वर्तमान में चल रही प्रशासनिक व्यवस्था को ‘अव्यवस्था’ कहें तो गलत नहीं होगा। इसकी वजह है कि कहीं कार्यवाहक तो कहीं अधिकारियों के रिक्त पद लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हैं। आमजन के अलावा भाजपा पदाधिकारियों ने भी कई बार इस संबंध में राज्यमंत्री टीटी को अवगत करवाया है लेकिन स्थिति जस की तस है। ‘बाबू’ को देना पड़ता है ज्ञापन एसडीएम मुकेश बारैठ करीब एक माह से मेडिकल अवकाश पर हैं।
पदमपुर के एसडीएम संदीप काकड़ को यहां का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। जानकारी अनुसार इस दौरान वे महज तीन-चार बार ही यहां आए हैं। उधर, तहसीलदार की कार्यालय में कम उपस्थिति आजकल चर्चा में है। वहीं नायब तहसीलदार का पद रिक्त है। ऐसे हालात में समस्या का निराकरण तो छोड़ो समस्या के संबंध में ज्ञापनदाताओं को भी भटकने की मजबूरी है। कोई अधिकारी के नहीं मिलने पर मजबूरन ऐसे लोगों को ‘बाबू’ को ही ज्ञापन देना पड़ता है।
तहसीलदार साहब खाना खाने गए हैं
तहसीलदार की कार्य प्रणाली भी चर्चा में है। कार्यालय में उनकी उपस्थिति कथित रूप से नाम मात्र की होने से परिवादी परेशान हुए बिना नहीं रहता हैै। और इस दौरान बाबूओं का यह कहना कि ‘तहसीलदार साहब खाना खाने गए हैं’ लोगों के लिए मजाकिया डॉयलॉग बन गया है। एसडीएम की अनुपस्थिति में तहसीलदार भी कार्यालय में नहीं होने से सुचारू कार्य तो छोड़ों लोगों को ज्ञापन आदि देने के लिए भटकने की मजबूरी है। हालांकि तहसीलदार गजेन्द्रसिंह नैण का कहना है कि कार्य सुचारू चल रहा है। और चुनाव व निरीक्षण जैसे कार्यों के लिए फील्ड में जाना अनिवार्य है।
विकास के लिए बिठाया ‘जुगाड़’ आपको जानकर हैरानी होगी कि श्रीकरणपुर पंंचायत समिति में दो साल से विकास अधिकारी का पद खाली है। और मजे की बात है कि जिला परिषद के एक एईएन को प्रतिनियुक्त कर यह जिम्मेवारी दे रखी है। जनप्रतिनिधियों से लेकर आमजन में भी यह बात चर्चा का विषय है। गौरतलब है कि दो साल पहले तत्कालीन बीडीओ अदित्यासिंह मेहरा के सरपंचों से हुए विवाद के बाद २६ नवंबर २०१५ को जिला परिषद के एईएन सुखमिंदर सिंह को यहां बीडीओ लगाया गया था। तब से वे ही विकास अधिकारी का जिम्मा संभाल रहे हैं।
दुरुस्त होनी चाहिए प्रशासनिक व्यवस्था ‘राज्यमंत्री के विधानसभा मुख्यालय पर प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए। कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारियों के नहीं मिलने से आमजन को निराशा होती है। वहीं एक अधीनस्थ कर्मचारी को बीडीओ जैसे महत्वपूर्ण पद पर बिठाना समझ से परे है।’ अमृतपालकौर बराड़ प्रधान पंचायत समिति श्रीकरणपुर।
Published on:
09 Dec 2017 12:09 pm
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