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श्रीगंगानगर में ऐसा क्या हुआ कि मजबूरन महिलाएं सडक़ पर लेटी तो थमा ट्रैफिक

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What happened in Sriganganagar that the women were forced to ride on

श्रीगंगानगर में ऐसा क्या हुआ कि मजबूरन महिलाएं सडक़ पर लेटी तो थमा ट्रैफिक

श्रीगंगानगर। महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संगठन की ओर से पिछले पांच दिनों से कलक्ट्रेट के समक्ष दिए जा रहे धरने में उस समय खलबली मच गई जब आंदोलनरत मजबूरन होकर सडक़ पर लेट गई। इससे गंगासिंह चौक से भगतसिंह चौक तक वाहनों की आवाजाही एकाएक थम गई। यह देखकर वहां तैनात पुलिस दौड़ी और इन महिलाओं को सडक़ से खदेडकऱ धरना स्थल पर पहुंचाया। इस दौरान दो महिलाओं की हालत खराब होने पर राजकीय जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

रात को इन महिलाओं ने धरना स्थल पर ही डेरा जमाने की घोषणा की तो पुलिस अफसरों के हाथ पांव फूल गए और आनन फानन में कोतवाली स्टाफ ने आकर अपना रंग दिखाया। कोतवाली सीआई हनुमानाराम बिश्नोई की मनमर्जी इतनी अधिक थी कि वे धरने पर बैठी आंगनबाड़ी मानदेय कर्मियों केा खदेडऩे के लिए महिला कांस्टेबल की बजाय पुरुष पुलिस कर्मियों को लेकर आए और आते ही टैंट उखाडऩे लगे।

जब वहां जिलाध्यक्ष सीता स्वामी सहित कई आंदोलनरत महिला कार्मिको ने विरोध किया तो वे तैश में आ गए। कोतवाली के स्टाफ ने आनन फानन में टैट उखाडऩा शुरू कर दिया। यहां तक कि रात के समय आंदोलन जारी रखने के लिए मंगवाई गई रजाईयां और दरी तक उठाने लगे। पुलिस का कहना था कि सीएम का दौरा तय हो चुका है। ऐसे में सीएम का काफिला कल्क्ट्रेट पहुंचेगा, ऐसे में वहां टैंट अड़चन बन सकता है।

जबकि जिलाध्यक्ष स्वामी का कहना था कि धरना और रात के समय धरना जारी रखने के लिए बकायदा जिला कलक्टर से अनुमति ली गई है लेकिन कोतवाली सीआई ने एक भी बात नहीं सुनी। यहां तक कि रात के समय महिलाओं को खदेडऩा या पूछताछ करने के लिए महिला पुलिस कर्मी या महिला पुलिस अफसर की मौजूदगी में होना जरूरी है लेकिन कोतवाली पुलिस ने इसकी परवाह नहीं की।

जिलाध्यक्ष सीता स्वामी का कहना है कि पुलिस की यह गुंडागर्दी ओच्छी मानसिकता की हकीकत बयां कर रही है। सरकार बदल गई है लेकिन पुलिस प्रशासन में अब भी पुरानी सरकार के गुर्गे पदों पर बैठकर जनता को तंग और परेशान कर रहे है। पुलिस के अधिकारियों को इसका जवाब देना होगा। क्या लोकतंत्र में अपनी बात या अपनी मांग को लेकर धरना देना गुनाह है। जब कलक्टर ने धरने की अनुमति दे रखी थी तो पुलिस ने अनावश्यक रूप से दखंलदांजी क्यो और किस हैसीयत से की है।

ग्रामीण अध्यक्ष उषा वर्मा का कहना था कि अब तक जनता के साथ कंधे कंधे मिलाकर स्वच्छ प्रशासन का दावा करने वाले कांग्रेस के दिग्गज कहां गए है। कलक्ट्रेट गेट पर धरने पर बैठी निहत्थी महिलाओं को पकडकऱ और टैंट फाडऩे वाले खाकी वाले गुंडों से बचाने के लिए जनप्रतिनिधियों को सांप संूघ गया है। ऐसे कांग्रेस और भाजपा सहित राजनीतिक दलो के प्रतिनिधि अपने घरों में दुबक गए है। आंदोलन में सक्रिय केसरदेवी का कहना था कि आखिर महिलाओं का यह कैसा सम्मान है।

एक ओर सरकार आठ मार्च को महिला दिवस मनाकर महिला सशक्तिकरण का दावा करती है। जिला प्रशासन भी ऐसे महिला दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर नाटक करता है, जबकि महिला दिवस के तीस घंटे पहले पुलिस की यह कार्रवाई घटिया और नीच प्रकृति मानसिकता का परिचय दे रही है। ऐसे जनप्रतिनिधियों को अब हाथ में चूड़ी पहन लेनी चाहिए। वहीं साथिन अध्यक्ष निर्मला बिश्नोई का कहना था कि आंदोलन शांतिपूर्वक चल रहा था तो पुलिस ने जानबूझकर वहां दखलदांजी किस हैसीयत से की है, इस संबंध में संगठन के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों को अवगत कराया गया है। सीएम के आने पर संगठन स्तर पर विरोध किया जाएगा।

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