
चिकित्सा व्यवस्था बिगड़ी, लोग हो रहे परेशान
-अनूपगढ़ विधानसभा क्षेत्र के किसी भी अस्पताल में नहीं विशेषज्ञ चिकित्सक
अनूपगढ़.
विधानसभा क्षेत्र के सरकारी अस्पताल लम्बे समय से इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के लिए चुनौती रहें है। अब तक कई सरकारें बदलने के बावजूद अस्पताल के हालात में बदलाव नहीं आया है।
लंबे समय से रिक्त हैं चिकित्सकों के पद
अनूपगढ़ विधानसभा क्षेत्र के चिकित्सालयों में पिछले काफी समय से चिकित्सकों के पद रिक्त चल हैं। वर्ष 2018 में चिकित्सकों के पदों पर नियुक्ति के लिए यहां के लोगों ने लगातार कई दिन तक बाजार बंद कर आंदोलन किया था। इसके परिणाम स्वरूप विभाग ने ऐसे चिकित्सकों की नियुक्ति अनूपगढ़ अस्पताल में कर दी जो लंबे समय से अवकाश पर चल रहे थे।
इसके बाद लोगों ने विरोध करते हुए बाजार बंद रखा, लेकिन फिर भी अस्पताल में चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की गई।
दुर्दशा पर आंसू बहा रहा चिकित्सालय
अनूपगढ़ विधानसभा क्षेत्र में तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा आठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इन तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केदं्रों में चिकित्सकों के 26 पद स्वीकृ त हैं। इनमें आठ पदों पर चिकित्सक कार्यरत हैं। घड़साना का चिकित्सकालय मात्र दो चिकित्सकों के भरोसे चल रहा है। वहींं अनूपगढ़ के चिकित्सालय में 14 में से 10 पद रिक्त पड़े हैं। इसी प्रकार रावला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन पद रिक्त पड़े है। विधानसभा क्षेत्र के सभी चिकित्सालयों में नेत्र चिकित्सक, गाइनी, सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ सहित अन्य कई पद रिक्त है। हालांकि रावला तथा अनूपगढ़ चिकित्सालय में एक-एक चिकित्सक पद स्थापन पर लगा रखा है लेकिन यह व्यवस्था रोगियों की संख्या को देखते हुए पर्याप्त नहीं है।
जानकारी के अनुसार अनूपगढ़ विधानसभा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में औसतन 1050 रोगियों की ओपीडी होती है। इसके अलावा अस्पताल में रोगियों को मिलने वाली अनेक सुविधाओं का भी टोटा है।
कई बार राज्य सरकार को करवाया अवगत
विधानसभा क्षेत्र के राजकीय चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इससे उपचार संबंंधी कार्य प्रभावित होता है। इन पर नियुक्ति के लिए कई बार राज्य को अवगत करवाया गया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
-डॉ.एमएल गुप्ता, ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अनूपगढ़
Updated on:
04 Jan 2019 04:51 pm
Published on:
04 Jan 2019 04:51 pm
