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श्रीगंगानगर.
साहब, हम मजदूरी करते हैं। वेटर का काम करके पेट पालते हैं। तीन साल पहले हमारे बच्चों का आरटीई के तहत प्रवेश हुआ था लेकिन इस बार स्कूल वाले यह कहते हुए फीस मांग रहे हैं कि आपका बच्चा अब आरटीई में नहीं है, ये कैचमेंट एरिया से बाहर है। इतना ही नहीं, आप कहते हो कि किताबें और कॉपियां भी सरकार देती है लेकिन हमसे तो स्कूल दुकान विशेष से ही मंगवाता है और हर वर्ष 1800 से 1900 रुपए वसूल रहा है। अब आप ही बताओ, हम एक एक बच्चे के बीस बीस हजार कहां से लाएं? कुछ एेसी ही शिकायतों को लेकर बुधवार को आरटीई के जिला प्रभारी के पास तीन अभिभावक पहुंचे। ये शिकायतें बसंती चौक रोड के ब्ल्यू बर्ड और लवकुश मॉडल स्कूल की लिखित में की गई हैं।
करेंगे कार्रवाई
हां, ये शिकायतें लिखित में मिली हैं और गलती चाहे स्कूल की हो या अभिभावक की। नि:शुल्क प्रवेशित बच्चे को संबंधित स्कूल को पढ़ाना ही होगा। किताबें और कॉपियां भी स्कूल को ही देनी होगी। अब जांच कर कार्रवाई करेंगे।
महेश मीणा, जिला प्रभारी, आरटीई।
इसमें हमारी ओर से कोई गलती नहीं की गई है और ना ही हम किसी को परेशान करते हैं। जो अभिभावक शिकायत कर रहे हैं, उनके बच्चे की बर्थ सर्टिफिकेट नहीं लगी हुई। पिछले वर्ष भी निरीक्षण में अधिकारियों ने इस बच्चे को निकालने का कहा था, लेकिन हमने नहीं निकाला। इस बार भी निरीक्षण में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ही इसका नाम आरटीई से हटाया है।
संदीप कुमार, संचालक, ब्ल्यू बर्ड स्कूल।
हमने पहले एक बार फीस मांगी थी लेकिन जब जब अखबार में आया कि आरटीई में प्रवेशित बच्चे की नहीं ले सकते तो उसके बाद हमने किसी से भी फीस नहीं मांगी।
ओमप्रकाश कारगवाल, संचालक, लवकुश मॉडल स्कूल।
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