
फोटो - प्रतीकात्मक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरिस्का के सीटीएच इलाके के एक किमी दायरे में आई करीब 92 खानें बंद होने का सीधा असर मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र में इससे जुड़े उद्योगों पर पड़ा है। इन उद्योगों की जमीनों में तीन हजार रुपए प्रति वर्गमीटर तक की गिरावट आई है। इसके बाद भी उद्योगपति कम दामों में भी जमीनों को बेचकर निकल रहे हैं।
एमआईए में रीसेल में जमीनों के दाम करीब 12 से 13 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर के आसपास है, लेकिन खानों के बंद होने के बाद इनके दाम 9 से 10 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर रह गए हैं। दामों में गिरावट के बावजूद पिछले दिनों में एमआईए में एक उद्योगपति ने 9500 रुपए प्रति वर्गमीटर में अपने उद्योग की जमीन को बेचा है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मई, 2024 में खानों को बंद करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद से लगातार उद्योगों का उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम रह गया है। एमआईए और राजगढ़ में करीब 500 उद्योग मिनरल्स एंड माइंस से सीधे जुड़े हैं।
सरिस्का क्षेत्र में जो खानें बंद हुई हैं, ये मार्बल की थीं। ग्राइंडिंग उद्योगों को मार्बल पत्थर सप्लाई होता था। इन फैक्ट्रियों में रोजाना पन्द्रह से बीस हजार टन पाउडर का उत्पादन होता था, जो पूरे देशभर में सप्लाई होता था। अब उत्पादन 5 से 10 हजार टन प्रतिदिन ही हो रहा है। कई उद्योगों ने अपना स्टाफ भी कम कर दिया है। साथ ही बिजली के अतिरिक्त कनेक्शन भी बंद करवा दिए हैं।
खानों के बंद होने से करीब 500 उद्योग प्रभावित हुए हैं। इनमें प्रोडक्शन भी कम हो गया है। साथ ही यहां काम करने वाले मजदूरों की संया भी आधी हो गई है।- एम.आर. मीणा, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, अलवर
सरिस्का की खानें बंद होने से उद्योगों पर बुरा असर पड़ा है। खनन से जुड़े उद्योगों की जमीनों की पुनर्बेचान दरों में तीन हजार रुपए प्रति वर्गमीटर तक की कमी आई है। कई उद्योग राजसमंद, उदयपुर, बांसवाड़ा की तरफ भी रुख कर गए हैं।- गोविंद गर्ग, अध्यक्ष, मत्स्य उद्योग संघ
अलवर की अधिकांश कंपनियों को पत्थर टहला, खोह, टोडा, जयसिंहपुरा और झिरी आता है। ये खाने बंद होने के कारण अब अलवर-राजगढ़ से कंपनियां पलायन करने लगी है। गुजरात और कई राज्यों सहित राजस्थान के मकराना, राजसमंद, बांसवाड़ा व आबू में यह उद्योग शिट होने लगे हैं। जिन बड़ी कंपनियों ने पुट्टी बनाने के लिए अलवर के एमआईए में प्लांट लगाए थे वो भी अब दूसरे जिलों में शिट होने लग गए हैं।
एमआईए-राजगढ़ में तैयार होने वाले मार्बल पाउडर से पेंट, रबर, साबुन-सर्फ, पुट्टी, रेग्जीन, टाइल्स और पीवीसी पाइप बनाए जा रहे हैं। साथ ही कई सौंदर्य सामग्री भी इस पाउडर से बनाई जाती है। इन खानों से सरकार को रॉयल्टी के रूप में करोड़ों रुपए का राजस्व भी मिलता है। उधर, ट्रांसपोर्ट और मूर्ति उद्योग भी इससे प्रभावित हुए हैं।
Published on:
10 Mar 2025 12:14 pm

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