
बिहार विधानसभा में उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल और राजद विधायक भाई वीरेंद्र
Bihar Vidhan Sabha: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने भूमि सुधार एवं राजस्व से जुड़े मामलों पर सरकार के भीतर ही पहल की जरूरत बताते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के सामने मांग रख दी। इस पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने तुरंत चुटकी लेते हुए कहा कि यह पहली बार देख रहे हैं जब एक मंत्री को अपनी बात मनवाने के लिए दूसरे मंत्री से गुहार लगानी पड़ रही है।
उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने सदन में उद्योगों के विकास के लिए जमीन की किल्लत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य के कई इलाकों में नदियों की धारा बदल चुकी है। कहीं बांध बनने से पुरानी नदी की जमीन खाली हो गई है, तो कहीं किनारों पर बड़ी मात्रा में नई भूमि उभर आई है। लेकिन वर्तमान सरकारी रिकॉर्ड में इन जमीनों की प्रकृति (Nature) ऐसी है कि इनका हस्तांतरण उद्योगों के लिए नहीं किया जा सकता।
मंत्री ने विजय सिन्हा से आग्रह किया कि जल संसाधन मंत्री के साथ बैठकर इन जमीनों की समीक्षा की जाए ताकि इनका उपयोग उद्योग और विकास कार्यों के लिए हो सके। उन्होंने सुझाव दिया कि इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए। जल संसाधन विभाग के साथ बैठकर यह तय किया जाए कि बदलती भौगोलिक स्थिति के अनुसार जमीन की प्रकृति में संशोधन संभव है या नहीं। उनके मुताबिक, अगर ऐसा होता है तो उद्योग लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने में काफी सहूलियत होगी।
जैसे ही मंत्री ने अपनी बात खत्म की, राजद के भाई वीरेंद्र खड़े हो गए। उन्होंने उद्योग मंत्री की मांग पर कहा कि वे कई बार सदन के सदस्य रह चुके हैं, लेकिन ऐसा दृश्य कम ही देखा है जब एक मंत्री को दूसरे मंत्री से आग्रह करना पड़े। उन्होंने इसे सदन की परंपरा और गरिमा से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए।
भाई वीरेंद्र ने तंज कसते हुए कहा कि विधायक ऐसा करें तो समझ आता है, लेकिन मंत्रियों को यह चर्चा कैबिनेट या आपसी बैठकों में करनी चाहिए, न कि सदन के पटल पर।
दिलीप जायसवाल ने भी जवाब दिया कि वे राज्य के विकास के लिए मुद्दा उठा रहे हैं और इसमें गलत क्या है। उनका कहना था कि उद्योग को जमीन मिलेगी तो रोजगार बढ़ेगा, निवेश आएगा और राज्य को फायदा होगा। इस बीच दोनों नेताओं के बीच हल्की नोकझोंक हुई।
स्थिति ज्यादा न बढ़े, इसके लिए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने माहौल शांत करने की कोशिश की और कहा कि मुद्दा महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे सकारात्मक तरीके से देखा जाना चाहिए। सदन में शोर बढ़ता देख स्पीकर प्रेम कुमार ने अगली कार्यवाही की ओर बढ़ने का निर्देश दिया और दूसरे सदस्य को बोलने का मौका दिया। इसके बाद मामला धीरे-धीरे शांत हुआ, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी रही।
Published on:
09 Feb 2026 03:12 pm
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