
Exclusive : यहां दो दिन में बिकीं करोड़ों की लाठियां, ये है हैरान करने वाली वजह
राम सुमिरन मिश्र
सुलतानपुर. अब न तो लाठियों का दौर है और न ही लठैतों का जोर है, फिर भी सुलतानुपर के ऐतिहासिक पांडेय बाबा मेले में कई करोड़ रुपयों की लाठियों का कारोबार होता है। प्रदेश के कई जिलों से पांडेय बाबा मेले में आये लोग बड़े पैमाने पर यहां से लाठियों की खरीदारी करते हैं। उल्लेखनीय है कि फैजाबाद जिले का कुमारगंज क्षेत्र लठैतों के नाम से विख्यात है। यहां लोग कहीं भी आने-जाने के लिए लाठी लेकर ही चलते हैं। लाठी के दम पर ही मूछों पर ताव देते हैं। यहां पुरुष से बड़ा कद लाठियों का होता है। वैसे तो लाठियों की कई वैरायटी हैं, लेकिन जो दो वैराइटी ज्यादा प्रचलित हैं, उनमें दुबिया और चाव बांस से बनी लाठियां हैं। इस वैराइटी की लाठियां ही पांडेय बाबा मेले में आकर्षण का केंद्र रहती हैं।
देश में मशहूर पांडेय बाबा मेला विजयदशमी के दिन लगता है जो दो दिन तक चलता है। इस मेले में सबसे ज्यादा कारोबार लाठियों का होता है। जौनपुर, प्रतापगढ़, फैजाबाद, अंबेडकरनगर समेत प्रदेश के कई जिलों से लोग पांडेय बाबा मेले में लाठियां खरीदने आते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े व्यापारी और कारोबारी भी यहां लाठियों के व्यापार में हाथ आजमाते हैं।
लाठी कारोबार से कई परिवारों की चलती है रोटी
पांडेय बाबा मेले में लाठियों के कारोबार से कई परिवारों की साल भर रोजी-रोटी चलती है। यहां के लाठी कारोबारी साल भर लाठियां तैयार करते हैं और पांडेय बाबा मेले में लाठियों का कारोबार करते हैं। लाठी कारोबारी रामयज्ञ यादव बताते हैं कि इसी दिन के इंतजार में वह साल भर लाठियां बनाते हैं। पूछने पर रामयज्ञ ने बताया कि इस बार उन्होंने बाबा के मेले में 8 लाख रुपये की लाठियों का कारोबार किया है। उन्होंने बताया की बीते वर्ष लाठियों की बिक्री और ज्यादा हुई थी।
साल भर मेले का इंतजार करते हैं लोग
लाठियों के शौकीन लोग भी पांडेय बाबा के मेले के आने की प्रतीक्षा साल भर करते हैं। मेले में आये राम भवन दूबे कहते हैं कि मैं बाबा का मेला आने का इंतजार साल भर इसलिए करता हूं कि मैं यहां से एक-दो लाठी खरीद कर घर ले जाता हूं। यह पूछने पर कि अब लाठियों और लठैतों का जमाना (दौर) नहीं रहा ? इस पर दूबे कहते हैं कि भले ही लाठियों और लठैतों का दौर नहीं हो, लेकिन लाठियां अब भी उतनी ही उपयोगी हैं, जितनी पहले थीं। हम तो यहां से लाठियां बाबा का प्रसाद समझकर खरीदते हैं।
Updated on:
21 Oct 2018 03:27 pm
Published on:
21 Oct 2018 03:24 pm
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