
अवैध असलहों की बरामदगी को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने माना संदिग्ध, पूर्व मंत्री के इशारे पर किया ये काम
सुलतानपुर. एक पूर्व मंत्री के इशारे पर पुलिस ने दो लोगों के कब्जे से अवैध असलहा बरामदगी दिखाकर उनका चालान दफा 25 आर्म्स एक्ट के तहत किया था। लेकिन न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पहुंचते ही असलियत सामने आ गई और मजिस्ट्रेट ने पुलिस की इस कहानी को संदिग्ध माना। अवैध असलहे की बरामदगी मामलें में पुलिस की कहानी को प्रथम दृष्टया संदिग्ध मानते हुए प्रभारी एसीजेएम षष्टम आभा पाल ने आरोपियों की जमानत मंजूर कर ली है। पुलिस की इस कार्यवाही के पीछे एक पूर्व मंत्री की पैरवी की बात सामने आ रही है।
आरोपियों को जेल भेजने का आदेश
मामला जामों थाना क्षेत्र के सूखी बाजगढ़ गांव से जुड़ा है। जहां के रहने वाले धीरज सिंह उर्फ धीरेन्द्र प्रताप सिंह व शैलेन्द्र सिंह निवासी अगरावां की अवैध असलहें के गिरफ्तारी दर्शाते हुए जामों पुलिस ने बुधवार को जेल भेंजने की कार्यवाही की थी। मामलें में सुनवाई के पश्चात आरोपियों की क्रिमिनल हिस्ट्री तलब करते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को जेल भेजने का आदेश दिया था। आरोपियों की जमानत पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जमानत पर विरोध जताया।
वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता रविवंश सिंह ने बताया कि बीते फरवरी माह मे हुई हत्या की वारदात में गलत ढंग से प्रमोद तिवारी व उदयभान सिंह आदि को पुलिस फंसाने के प्रयास में जुटी है। जिसकी सीबीसीआईडी एवं अन्य जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बुधवार को धीरेन्द्र व शैलेन्द्र क्षेत्र के अन्य लोगों के साथ गुरूवार को होने वाले धरने के सम्बन्ध में एसडीएम को ज्ञापन देने गये थे। बचाव पक्ष का तर्क है कि एसडीएम ने इस सम्बन्ध में स्थानीय पुलिस को भी सूचना देने की बात कहीं। इसी बात की सूचना देने के लिए धीरेन्द्र व शैलेन्द्र थाना जामों गये थे। आरोप है कि पुरानी रंजिश के चलते पूर्व मंत्री जंगबहादुर सिंह मामले में पैरवी कर रहे है,जिनके ईशारे पर पुलिस ने युवकों के पास से गलत ढंग से असलहें की बरामदगी दर्शाते हुए फर्जी मुकदमें में फंसा दिया। इसी आधार पर बचाव पक्ष ने जमानत की मांग की। उभयपक्षों को सुनने के पश्चात न्यायाधीश आभापाल ने आरोपियेां की जमानत के लिए पर्याप्त आधार पाते हुए उनकी अर्जी मंजूर कर ली है।
Published on:
30 Jun 2018 07:44 pm
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