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Atiq Ahmad: अतीक का खत लेकर जनसभा में पहुंची थी शाइस्ता, बाप का खत पढ़ सिसक-सिसक कर रोया था बेटा

Atiq Ahmad: 2017 के बाद से प्रदेश की राजनीति में अकेले पड़े अतीक ने 2021 में AIMIM का दामन थामा था। उसकी पत्नाी साइस्ता ने लखनऊ में ओवैसी के सामने ली थी पार्टी की सदस्यता।

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सुलतानपुर की जनसभा में शाइस्ता परवीन

माफिया अतीक अहमद और भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। प्रदेश में माफिया से लेकर माननीय बनने तक का सफर पूरा करने वाला अतीक कभी एक पार्टी में नहीं रहा। हालांकि उसने अपनी राजनीति का सबसे लंबा समय समाजवादी पार्टी में बिताया था। लेकिन सपा में अखिलेश का राज आने के बाद उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

अतीक का सबसे बुरा दौर तब शुरु हुआ जब प्रदेश में योगी सरकार आई। योगी के सत्ता में आने के बाद उसे साबरमती जेल में भेज दिया गया। इसके बाद उसने सितंबर 2021 में AIMIM का दामन थामा और अपनी पत्नी को ओवैसी के जनसभा में अपने एक खत के साथ भेजा था। आइए जानते है उस खत में ऐसा क्या था जिसे पढ़कर उसका बेटा सिसक-सिसक कर रोने लगा था…

सुलतानपुर की जनसभा में पहुंची थी शाइस्ता
साल था 2021 अतीक अहमद जो कि उस समय साबरमती जेल में बंद था। लेकिन उसका सियासत का कामकाज जारी था। इसी साल अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन ने लखनऊ पहुंचकर AIMIM के अध्यक्ष ओवैसी के समक्ष पार्टी ज्वाइन की थी। जिस दिन शाइस्ता ने AIMIM ज्वाइन की ठीक उसके दूसरे दिन वह सुल्तानपुर पहुंची जहां ओवैसी की सभा थी। शाइस्ता के साथ बेटा मोहम्मद अली और उसकी नन्द शाहीन साथ में थे। शाइस्ता ने साबरमती जेल में बंद पति अतीक का भेजा हुआ खत जैसे ही पढ़ा तो बेटे की आँखें नम हो गई।


अतीक का खत सुलतानपुर की जनता के नाम
बात है 8 सितंबर सन 2021 की जब शाइस्ता ने अपने भाषण की शुरुआत उस खत से किया जो उसे उसके पति अतीक ने दिया था। माफिया अतीक ने खत की शुरुआत सुलतानपुर की जनता के नाम अपने सलाम से किया था। उस खत में लिखा, ”सुलतानपुर के बुजुर्गों को सलाम। मैं एक बार आपके बीच आया था। आपने इस्तकबाल किया, उसका शुक्रिया।" इसके बाद उसने लिखा- हालात बदल गए हैं, फिक्र बदल गई है मुझे अल्लाह ने हिदायत दी, मेरा पैगाम लेकर मेरी बीवी आपके बीच में है।

AIMIM हमारा घर है
अतीक ने खत में आगे लिखा... ये लड़ाई सांसद, विधायक बनने की नहीं है, बल्कि ये लड़ाई पूरे मुल्क में हिस्सेदारी की है। अब हम दूसरे का झंडा नहीं उठाएंगे, जो 100 में 7% हैं, वो मुखिया बने हैं, जो 100 में 22% हैं, वो टायर जोड़ रहे और रिक्शा चला रहे हैं। हमें आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बनना होगा। मुसलमान ने किसी को अपना नेता नहीं माना, ये बड़ी गलती की। ओवैसी साहब साहिबे इल्म हैं, हमें ये रहनुमा के रूप में मिले हैं। हिंदुस्तान में इसका सानी नहीं है। AIMIM हमारा घर है। अब दूसरों के घर में नही रहेंगे न दूसरों का झंडा उठाएंगे। आपका अपना अतीक अहमद।

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बाप का खत पढ़ रोया था बेटा
इधर जब शाइस्ता अतीक का भेजा हुआ खत पढ़ रही थी तो उसके साथ उसके बगल में उसका लड़का मोहम्मद अली भी खड़ा था। जब वह अपनी माँ की जुबानी अपने पिता द्वारा भेजें गये खत को सुनकर सहन न कर पाया था और उसकी आंखें नम हो गई थी।