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कुपवाड़ा में सर्च ऑपरेशन के दौरान सुल्तानपुर का बेटा बलिदान, नम आंखों से इकलौते बेटे को पिता ने दी मुखाग्नि

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में सर्च आपरेशन के दौरान बंधुआकला के मझना के अखिलेश गोली लगने से घायल हो गए थे। दिल्ली के सैन्य अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी बुधवार को मौत हो गई थी।

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फ़ोटो सोर्स: पत्रिका, बलिदानी को दी गई श्रद्धांजलि

जम्मू के कुपवाड़ा में 28 मार्च को सर्च ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से घायल जवान अखिलेश शुक्ला बलिदान हो गए। उनका दिल्ली में इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर सुल्तानपुर के पैतृक गांव मझना पहुंचा, जहां अंतिम दर्शन के लिए भारी संख्या में लोग मौजूद थे। अयोध्या से पहुंचे डोगरा रेजिमेंट के जवानों ने उन्हें सैन्य सम्मान के साथ कंधा दिया।

इसके बाद उनके पिता ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। इस दौरान ‘अखिलेश शुक्ला अमर रहें’ के नारों से क्षेत्र गूंज रहा था, लोगों ने नम आंखों से सपूत को अंतिम विदाई दी। अखिलेश अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। गोली लगने से महज 3 दिन पहले ही वह घर से ड्यूटी के लिए गए थे।

तीन साल पहले नायक पद पर सेना में भर्ती हुए थे

सुल्तानपुर के अलीगंज क्षेत्र के मझना गांव के रहने वाले अखिलेश शुक्ला के पिता कृष्ण शुक्ल भी सेना में सूबेदार पद से रिटायर हैं, घर पर उनके मां, पिता जी रहते हैं। बड़ी बहन प्रियंका दिल्ली पुलिस में हैं। छोटी बहन शिवानी प्रयागराज से सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही हैं। अखिलेश तीन साल पहले सेना की 33 वर्कशॉप EME कोर में नायक पद पर भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू के कुपवाड़ा में थी। परिजनों ने बताया कि वह 22 मार्च को घर में आयोजित विवाह कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। 25 मार्च को ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे।

कुपवाड़ा में सर्च ऑपरेशन के दौरान हुए घायल, बुधवार को हुआ निधन

28 मार्च की रात करीब 9 बजे कुपवाड़ा क्षेत्र में सेना का सर्च ऑपरेशन चल रहा था। इस ऑपरेशन में वे अपने साथियों के साथ शामिल थे। इसी दौरान उन्हें गोली लग गई। गंभीर रूप से घायल होने पर उन्हें दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहां उनका इलाज चल रहा था। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। कुछ ही देर में उनका निधन हो गया, घटना के बाद सेना के सूचना विभाग की ओर से पिता कृष्ण शुक्ल को फोन कर बेटे की शहादत की जानकारी दी गई।

अंतिम संस्कार के दौरान सैन्य सम्मान के साथ दी गई सलामी

बेटे के बलिदान होने की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शुक्रवार को अखिलेश शुक्ला का पार्थिव शरीर राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव मझना लाया गया। अंतिम दर्शन के लिए गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद को सलामी दी। बलिदानी को मुखाग्नि उनके पिता ने दी। अखिलेश शुक्ला को श्रद्धांजलि देने के लिए युवाओं ने बाइक रैली निकाली। इस दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘अखिलेश शुक्ला अमर रहें’ के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।

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