
सुलतानपुर. झोल भरी पुलिसिया कहानी को संदिग्ध मानते हुए मुख्यमंत्री की फ्लीट के आगे काला झंडा दिखाने के आरोपियों को मजिस्ट्रेट ने जमानत दे दी और उन्हें रिहा कर दिया । मुख्यमंत्री की फ्लीट पर काला झंडा दिखाने के मामले में गिरफ्तार हुए युवा सपाईयों को पुलिस ने सीजेएम की अदालत में पेश किया। प्रभारी सीजेएम अनुराग कुरील ने पुलिसिया कहानी को प्रथम दृष्ट्या संदिग्ध मानते हुए आरोपियों को राहत दी है। जिन्हें अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट के इस आदेश से सपाईयों में खुशी की लहर दौड़़ गयी ।
मामला कोतवाली नगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पर मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आकस्मिक दौरे के दौरान उनकी फ्लीट पर सपा के युवजन सभा जिलाध्यक्ष परमात्मा यादव, छात्र सभा जिलाध्यक्ष वैभव मिश्रा, पूर्व छात्र सभा जिलाध्यक्ष विकास चौरसिया एवं पूर्व सभासद प्रत्याशी सुनील चौरसिया ने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था में लगी सेंध पर एक्शन लेते हुए पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें बुधवार को करीब तीन बजे दिन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। इस दौरान बचाव पक्ष की तरफ से जमानत अर्जी भी प्रस्तुत की गयी। जिस पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने मुकदमें को मात्र राजनैतिक करार देते हुए आरोपों को निराधार बताया और जमानत पर रिहा करने की मांग की। वहीं अभियोजन अधिकारी ने अपराध को गम्भीर बताते हुए आरोपियों की क्रिमिनल हिस्ट्री थाने से तलब करने की मांग की। उभय पक्षों की बहस सुनने के पश्चात प्रभारी सीजेएम अनुराग कुरील ने युवा सपाईयों को राहत देते हुए उन्हें 25-25 हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र एवं जमानतनामा दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया।
अदालत के इस आदेश से सपाईयों में खुशी की लहर दौड़ गयी। सपाईयों ने रिहा हुए युवाओ का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। इस दौरान सपा जिलाध्यक्ष रघुवीर यादव, पूर्व जिपं अध्यक्ष पृथ्वीपाल यादव, महासचिव मो. अहमद, पूर्व जिला पंचायत सदस्य ज्ञान यादव, पूर्व प्रमुख अशोक वर्मा, छात्र सभा प्रदेश उपाध्यक्ष दीपू श्रीवास्तव, तेजेेन्द्र सिंह बग्गा, एमएलसी पुत्र डिम्पल सिंह, पीआरओ भोले सिंह, अमेठी के जयसिंह प्रताप यादव, छात्र सभा जिलाध्यक्ष प्रदीप यादव, मुलायम सिंह यूथ बिग्रेड जिलाध्यक्ष इनामुर्रहमान, लोहिया वाहिनी जिलाध्यक्ष देवेन्द्र यादव, सत्यपाल यादव, विजय प्रकाश यादव, सोनू भाई, राजेश यादव, उपेन्द्र यादव, गुंजन रावत, आशू तिवारी, हरीश यादव, उदयराज, युवा सपा नेता बृजेश यादव, मो. इसरार खां पप्पू, वासुदेव, आलोक यादव, आकाश दीप, कुंदन सिंह, देवी दयाल यादव, दिलीप यादव राजू आदि ने युवाओं का स्वागत किया।
हाई प्रोफाइल मामले में भी पुलिस ने किया खेल
कहते है कि जब कोई पद पर बैठा अधिकारी किसी की मदद करना चाहे तो वह किसी न किसी तरीके से कर ही देता है,शायद इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ,जिसमे अप्रत्यक्ष रूप से कोतवाल का सपा मोह दिखा।मौजूदा योगी सरकार में भी पुलिस कानूनी दाव-पेंच दिखाते हुए अप्रत्यक्ष रूप से सपा के ही पक्ष में खड़ी नजर आयी। इसी का परिणाम है कि एफआईआर समेत अन्य कार्यवाहियों में पुलिसिया कार्यशैली के चलते आरोपी युवा सपाइयों को राहत मिल गयी। वह भी मामला किसी आम आदमी से जुड़ा नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री से जुड़ा है। दरअसल कोतवाल श्यामसुंदर पांडेय ने अपनी एफआईआर में घटना 24 अप्रैल को 10ः10 बजे सुबह की बतायी है। जिसके बाद युवा सपाईयों की गिरफ्तारी 12ः45 बजे दर्शायी गयी है और मामले की एफआईआर शाम को करीब घटना से साढ़े नौ घंटे बाद 7ः45 बजे दर्ज करायी गयी है। ऐसे में जिस मामले में वादी स्वयं कोतवाल हो, मामला मुख्यमंत्री से जुड़ा हो और सारी मशीनरी उन्ही की हो, तो आखिर ऐसे में किन परिस्थितियों में एफआईआर दर्ज कराने से लेकर अन्य कार्यवाहियों में चूक क्यों बरती गयी। यहीं नहीं नियम-कानून को धता बताते हुए आरोपियों को 24 घंटे से काफी अधिक समय बीत जाने के बाद कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस की इन्ही कमियों का पूरा-पूरा लाभ आरोपियों को अदालत में मिला। इतने हाई प्रोफाइल मामले में यह चूक नगर कोतवाल ने ऐसे ही नहीं बरती है, बल्कि आरोपियों को लाभ दिलाने के पीछे इसकी वजह मानी जा रही है। ऐसे ही नहीं सपाईयों को लाभ दिलाने के पीछे कोतवाल बदनाम हो रहे है, बल्कि सपा के पूर्व विधायक अनूप संडा के खिलाफ एसीजेएम चतुर्थ की अदालत से गैर जमानतीय वांरट जारी होने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी न करना चर्चा में है। फिलहाल नगर कोतवाल श्यामसुंदर पांडेय से इस सम्बंध में बात की गयी तो उन्होंने गोल-मोल जवाब देते हुए अपनी सफाई दी।
Published on:
26 Apr 2018 11:25 am
बड़ी खबरें
View Allसुल्तानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
